Header Ads

अब सिर्फ गोरखालैंड राज्य गठन होगा GNLF का एजेंडा, 1986 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा पर जताया खेद


दार्जिलिंग : गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोर्चा (GNLF) ने पहाड़ की समस्या के स्थायी हल को कमर कस ली है। रविवार को पार्टी के पुराने तथा अनुभवी नेताओं ने कमान संभालते हुए गोरखा दुख निवारण संगठन सभागार में पार्टी नेताओं के संगठन गारेखा राष्ट्रीय पूर्व सैनिक संगठन की अगुवाई में पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा की। सभा के दौरान कोलकाता स्थित नवान्न भवन में मुख्यमंत्री के साथ पहाड़ के नेताओं की बैठक पर चर्चा करते हुए सीएम द्वारा पहाड़ समस्या के स्थायी हल का विषय उठाते हुए राज्य व केंद्र सरकार से वार्ता करने और पत्राचार करने का निर्णय लिया है। चर्चा के दौरान पहाड़ पर जीटीए प्रशासनिक व्यवस्था को खारिज करते हुए गोरखालैंड राज्य गठन और छठी अनुसूची की मांग को प्रमुखता से उठाने पर सहमति बनी। हालांकि बैठक में गोरामुमो अध्यक्ष मन घीसिंग उपस्थित नहीं थे। दागोपाप शासन के पूर्व पार्षद और सुभाष घीसिंग के करीबी रहे एनबी प्रधान,भक्त जैरू,भीम सुब्बा तथा पूर्व सैनिक नेता जीआर देवान लंबे समय के बाद पार्टी की मुख्य धारा में वापस आए हैं। गोरामुमो प्रमुख की गैर मौजूदगी में पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष जीआर देवान ने गोरखालैंड राज्य स्थापना की मांग पर आगे बढ़ने के साथ ही छठी अनुसूची की मांग पर कायम रहने तथा गोरखा समुदाय के हित में लड़ाई लड़ने की बात कही। उन्होने पार्टी स्टैंड में कुछ अंतर लाते हुए अलग राज्य स्थापना को ही गोरखा समुदाय और पहाड़ की समस्या का स्थायी हल करार दिया।

पार्टी ने हाल ही में गोरखा जन मुक्ति मोर्चा की अगुवाई में हुए आंदोलन को समर्थन देने पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि ऐसा न करने पर पहाड़ की जनता के बीच हरे झंडे पर धोखेबाजी जाति विरोधी होने का आरोप लगाते हुए ओछी सियासत की जाती जो पार्टी के मूल सिद्धांत के विपरीत है। इस कारण ही गोरामुमो ने आंदोलन और बंद दोनों में ही गोजमुमो का सहयोग किया था। हालांकि पार्टी ने हाल के सियासती हालात पर कोई चर्चा न करते हुए अपनी ओर से इस विषय पर आगे बढ़ने का दम बढ़ा। पार्टी के पुराने नेताओं ने 1986 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा को खेदजनक बताते हुए उस समय हुई भूल और गलतियों की पुनरावृत्ति न होने की प्रतिबद्धता जताई। पूर्व पार्षद एनबी प्रधान ने केंद्र व राज्य सरकार से वार्ता पर जोर देते हुए अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए दागोपाप शासन की तर्ज पर अलग गोरखालैंड राज्य स्थापना और छठी अनुसूची की मांग को केंद्रित कर शीघ्र ही आगे बढ़ने का ऐलान किया। वहीं पूर्व पार्षद भक्त जैरू ने कहा कि अब एक व्यक्ति के हाथ में सत्ता न देते हुए पूरे गोरखा समुदाय के हित के लिए लड़ाई लड़ने का समय आ गया है। उन्होने जीटीए और बीओए की निंदा करते हुए राज्य सरकार से पहाड़ की जनता के हित में हस्तक्षेप कर उचित उपाय करने की मांग की।

- एजेंसी

No comments

Powered by Blogger.