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गोरखालैंड की धुरी पर बंगाल की राजनीति, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने : प्रशांत झा का आलेख


कोलकाता/दार्जिलिंग : इन दिनों गोरखालैंड की धुरी पर पश्चिम बंगाल की राजनीति चल रही है। राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा आमने सामने है। गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (गोजमुमो) सहित गोरखालैण्ड को लेकर आंदोलन करने वाली पार्टियां दरकिनार हैं। नगरपालिका चुनाव में तृणमूल की आंशिक जीत से उत्साहित पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की पहाड़ पर कब्जा जमाने की कोशिश और गोजमुमो के विरोध से अशान्त पहाड़ पर शान्ति लौटती दिख रही है। लगातार 104 दिनों के बंद के बाद पहाड़ की लड़ाई अब समतल पर आ गई है। दार्जिलिंग को लेकर तृणमूल और भाजपा ने एक दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तृणमूल कांग्रेस महासचिव और राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी कहते हैं कि भाजपा गोरखालैण्ड के मुद्दे पर दोहरी नीति अपना रही है। पार्टी गोजमुमो प्रमुख बिमल गुरुंग और रोशन गिरि का समर्थन कर बंगाल का विभाजन करना चाहती है।

BJP गोरखालैंड का नहीं करता समर्थन
दूसरी ओर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं कि भाजपा गोरखालैण्ड का समर्थन नहीं करती। पहाड़ पर आग ममता बनर्जी ने लगाई है। बागी नेता विनय तमांग को नेता बनाने के लिए विमल गुरुंग और दूसरे गोजमुमो नेताओं को रास्ते से हटाने के लिए उन पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है। हम उसका विरोध करते हैं। सवाल है कि क्या तमांग ने गोरखालैण्ड की मांग छोड़ दी है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पहाड़ के लोगों के समक्ष अपना रूख स्पष्ट करें। सबसे दिलचस्प बात यह है कि भाजपा और तृणमूल दोनों अलग गोरखालैण्ड राज्य का विरोध कर रही है। भाजपा गोजमुमो प्रमुख विमल गुरुंग, रोशन गिरि के साथ नजर आ रही है, तो तृणमूल तमांग को जीटीए का कार्यवाहक अध्यक्ष बना कर उन्हें गुरुंग का विकल्प बनाने की कोशिश कर रही है।

गोरखालैण्ड की मांग बरकरार
तमांग कहते हैं कि वे गोरखालैण्ड के मुद्दे पर कायम हैं। वे लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखेंगे। दूसरी ओर गोजमुमो से निकल कर अलग पार्टी जाप बना कर ममता बनर्जी के संपर्क में रहने वाले हरका बहादुर छेत्री कहते हैं कि अलग गोरखालैण्ड राज्य की मांग से वे कभी भी समझौता नहीं कर सकते।

कभी साथ-साथ थे ममता- गुरुंग
ममता और गुरुंग ने वर्ष 2012 में जीटीए बनाया और पहाड़ की वादियों में सफर शुरू किया। इस बीच दार्जिलिंग में ममता बनर्जी के कैबिनेट बैठक करने और गुरुंग के विरोध से दार्जिलिंग की वादियां गोरखालैण्ड के आंदोलन की आग में फिर से जल उठी। सरकार ने गुरुंग, रोशन गिरि और विनय तमांग सहित गोजमुमो नेताओं पर यूएपीए के तहत देशद्रोह का मामला दर्ज किया। सभी भूमिगत हो गए, जबकि विनय तमांग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पाले में चले आए।

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