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बंगाल पुलिस का दावा, गुरुंग समर्थकों के पास 9 AK 47 समेत भारी असलहा बरामद, माओवादी से जोड़ा लिंक, PHOTOS


दार्जिलिंग/कोलकाता : आज दार्जिलिंग पुलिस व गोर्खा जनमुक्ति मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग समर्थकों के बीच कई घंटों तक गोलीबारी व संघर्ष का दौर चलता रहा। पुलिस ने इस दौरान गुरुंग के ठिकाने से 9 एके-47 राइफल, एक 9 एमएम पिस्तौल, 2000 कारतूस, जिलेटिन स्टीक, डेटोनेटर, वॉकीटॉकी, तार, बैटरी व अन्य सामान बरामद किया। हालांकि गुरुंग एक बार फिर पुलिस के हाथ नहीं लगे। गौरतलब है कि गोरखालैंड आंदोलन के दौरान अगस्त में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा गुरुंग के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के बाद से ही वे फरार हैं। उन पर दार्जिलिंग और आसपास के क्षेत्रों में हुई बम विस्फोट की घटनाओं में शामिल होने का आरोप है। इससे पहले सिक्किम सीमा में उनके छिपे होने की सूचना पर पुलिस कई बार छापेमारी कर चुकी है। 

बता दें कि दार्जिलिंग में आंदोलन की शुरुआत आठ जून को हुई थी और अब तक इसमें 12 लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन किसी पुलिसकर्मी के मारे जाने का यह पहला मामला है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मृत एसआई की पत्नी को पुलिस व पिता को शिक्षा विभाग में नौकरी देने का आश्वासन दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री राहत कोष से तत्काल पांच लाख रुपये देने का भी एलान किया गया है।

गुरुंग के माओवादी व उग्रवादियों से संबंध : ADG शर्मा
एडीजी पश्चिम बंगाल पुलिस का कहना है कि गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के प्रमुख बिमल गुरुंग के पूर्वोत्तर राज्यों के उग्रवादी संगठनों के साथ-साथ माओवादियों के साथ संबंध हैं। गुरुंग इन संगठनों से हथियार खरीदते हैं। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून और व्यवस्था) अनुज शर्मा ने कहा कि पुलिस के पास गुरुंग के माओवादियों और विद्रोही समूहों के साथ संबंध की जानकारी है।

जब्त किए गए हथियारों के जखीरें से उठ रहे कई सवाल
बंगाल पुलिस द्वारा आज मोर्चा प्रमुख विमल गुरुंग के ऊपर भारी मात्रा में हथियार रखने के जो आरोप लगाए गए हैं उनमें कई आरोप हास्यापद से नजर भी आते हैं जैसे पातलेबास स्थित स्कूली भवन कई माह से सीआरपीएफ के बेस के रुप में इस्तेमाल हो रहा है एवं इसी जगह इतनी भारी मात्रा में हथियार का पाया जाना कई सवाल भी खड़े कर रहा है। साथ ही इस इलाके में पुलिस की इतनी मुस्तैदी के बावजूद इतनी भारी मात्रा में हथियार कैसे रखे गए ? इस बारे में भी पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। एके-47 बहुत ही खतरनाक हथियारों की श्रेणी में आते हैं। अभी तक इन हत्यारों का ना पकड़ा जाना, कहीं ना कहीं पश्चिम बंगाल पुलिस एजेंसी की भी भारी चूक मानी जा सकती है।








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