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NDA महाबैठक में GJM चीफ बिमल गुरुंग ने उठाया गोरखाओं की समस्या पर सबका ध्यान, PHOTOS


वीर गोरखा न्यूज पोर्टल
नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी द्वारा बुलाए गए एनडीए गठबंधन के 33 दलों के प्रतिनिधियों के बीच गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष बिमल गुरुंग ने सम्पूर्ण भारतीय गोरखाओं की चिंताओं को इस महत्वपूर्ण बैठक में उठाया। प्राधानमंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष बिमल गुरुंग ने दार्जिलिंग पार्वत्य क्षेत्र से जुड़ी 3 बिंदुओं पर जोर देकर अपनी बात सामने रखी। उन्होंने कहा कि गोरखा समुदाय और आदिवासी समुदाय से किया गया वादा पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा 2016 में बिरपाड़ा और सिलीगुड़ी के रैली में गोरखा समुदाय के सभी 11 जातियों को अनुसूचित जनजाति (ST) में शामिल करने के वादे पर जल्द अमल करने की बात दोहराई। गुरुंग ने आगे कहा कि पार्वत्य क्षेत्र में एक स्वायत्त केंद्रीय विश्वविद्यालय को शुरू करने के किए केंद्र सरकार संज्ञान ले और इसे अतिशीघ्र पूरा करने की दिशा में जरूरी कदम उठाए।

गोरखा समुदाय की बात रखने में गुरुंग रहे कामयाब
संभवतः यह भारतीय इतिहास में पहली बार है जब गोरखा समाज की समस्याओं को इतने बड़े मंच पर उठाया गया हो। एनडीए के इस महाबैठक में 33 शीर्ष राजनितिक पार्टियों के 53 लीडर्स ने शिरकत की। वहीं गोरखा जनमुक्ति मोर्चा की तरफ से इस बैठक में अध्यक्ष बिमल गुरुंग और सहायक महासचिव बिनॉय तामंग ने हिस्सा लिया।

गोरखालैंड की बात को गुरुंग कर गए नजरअंदाज !
 इतने बड़े मंच से गोरखा समाज को उम्मीद थी कि गोरखा समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हुए बिमल गुरुंग गोरखालैंड राज्य की मांग को इस महाबैठक में पुरजोर तरह से रखेंगे। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वह गोरखालैंड मुद्दे पर खामोश ही रहे। हालांकि बैठक में क्या हुआ इसके बारे में अधिक जानकारी नहीं मिल पाई। वहीं इस मुद्दे पर जीटीए के उप सभापति बिनय तामंग ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में गलत जानकारी दी जा रही है। तामंग ने आगे कहा कि बिमल गुरुंग ने करीब 7 मिनट तक गोरखालैंड राज्य समेत सभी मुद्दों को प्रधानमंत्री और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने रखा।








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