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आखिर क्या है सन 1950 की भारत-नेपाल शान्ति-मैत्री संधि, पढ़ें इस ऐतिहासिक संधि के पूरे 10 अनुच्छेद


वीर गोरखा न्यूज पोर्टल
31 जुलाई, 1950 को राजधानी काठमाण्डू में नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोहन शमशेर जंग बहादुर राणा तथा भारत के राजदूत चन्द्रशेखर नारायण सिंह ने, दोनों देशों की सरकारों तथा नेपाल के महाराजा एवं सेनापति के अनुमोदन के बाद इस दस अनुच्छेदों वाले संधि पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

पहला : अनुच्छेद में भारत-नेपाल के प्राचीन सम्बंधों के आधार पर दोनों देशों में चिरकालीन शान्ति एवं मैत्री बनाए रखने तथा एक-दूसरे की सर्वोच्चता, अखण्डता एवं स्वतंत्रता को पूर्ण सम्मान देने की बात कही गई है।

दूसरा :  इस अनुच्छेद में पड़ोसी राज्यों के कारण या किसी और कारण से कोई भी गहरे मतभेद या गलतफहमी उत्पन्न होने पर, जिससे आपसी सम्बंधों पर बुरा असर पड़ता हो, आपस में सूचित करने का प्रावधान है।

तीसरा :  इस अनुच्छेद आपसी कूटनीतिक सम्बंध स्थापित करने के बारे में है।

चौथा : यह अनुच्छेद वाणिज्य दूत की नियुक्ति से सम्बंधित है।

पांचवां : यह अनुच्छेद नेपाल की सुरक्षा से सम्बंधित है। इसमें नेपाल अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक सैनिक हथियार, गोला बारूद, युद्ध सम्बंधी साजो-सामान, भारत या भारतीय क्षेत्र से होते हुए निर्यात करने के लिए स्वतंत्र है। परन्तु ऐसा करते समय उसे भारत से विचार-विमर्श करना होगा।

छठवां : यह अनुच्छेद दोनों देशों को पड़ोसी मित्रता के प्रतीक स्वरूप एक-दूसरे के नागरिकों को अपने सीमा क्षेत्र में उद्योग एवं आर्थिक विकास में समान नागरिक व्यवहार प्रदान करते हुए भागीदारी, रियायत तथा अधिकार प्रदान करता है।

सातवां : इस अनुच्छेद में दोनों देश अपने देश में एक-दूसरे के नागरिकों को रहने के हक, सम्पत्ति के मालिकाना हक, व्यापार-वाणिज्य में सहभागिता तथा एक-दूसरे देश में आने-जाने की समान सुविधा प्रदान करेंगे।

आठवां : इस अनुच्छेद के अनुसार, इस संधि के लागू होते ही पुरानी सारी संधियां स्वत: ही निरस्त हो जाएंगी!

नौवां : इस अनुच्छेद के अनुसार हस्ताक्षर के दिन से यह संधि लागू मानी जाएगी।

दस : इस अनुच्छेद में है कि दोनों देशों में से कोई भी देश इस संधि से हट सकता है, बशर्ते उसे एक वर्ष पूर्व इस बारे में सूचना देनी होगी। 




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