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साल 1791 में बनाए गए पिथौरागढ़ के ऐतिहासिक गोरखा किले का होगा सौंदर्यकरण, बनेगा संग्रहालय


पिथौरागढ़ : उत्तराखंड राज्य के कद्दावर वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने नगर के गोरखा किले में हो रहे सुंदरीकरण के काम का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1791 में बना विख्यात गोरखा किला पिथौरागढ़ की ऐतिहासिक धरोहर है। किले के मूल स्वरूप को जिंदा रखने की प्रशासन की तरफ से कोशिश की जाएगी। जल्द ही किले में गोरखा साम्राज्य से जुडी हुई वस्तुओं के संग्रह से संग्रहालय बनाया जा रहा है। वित्त मंत्री ने पांच साल बाद भी किले के सुंदरीकरण का काम पूरा न होने पर नाराजगी जताई।

4 करोड़ की लागत से किले का होगा सौंदर्यीकरण
गोरखा काल के बाऊलकीगढ़ किले के दिन बहुरने जा रहे हैं। लगभग चार करोड़ की लागत से किले का सौंदर्यीकरण होगा। पिथौरागढ़ नगर के मध्य में गोरखाकालीन किला है। इस किले में पूर्व में पिथौरागढ़ सदर तहसील का कार्यालय संचालित होता था। गोरखाकालीन यह किला धरोहर घोषित हो चुका है। धरोहर घोषित होने के कारण पर्यटन विभाग इसका सौंदर्यीकरण करने जा रहा है। इसके लिए चार करोड़ की धनराशि स्वीकृत हुई है।

गोरखा शासकों ने करवाया निर्माण
बाउलीकीगढ़ नामक इस किले का निर्माण 1791में गोरखा शासकों ने किया था। नगर के ऊंचे स्थान पर 6.5 नाली क्षेत्रफल वाली भूमि में निर्मित इस किले के चारों ओर अभेद्य दीवार का निर्माण किया गया था। इस दीवार में लंबी बंदूक चलाने के लिए 152 छिद्र बनाए गए हैं। यह छिद्र इस तरह से बनाए गए हैं कि बाहर से किले के भीतर किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता। किले के मचानों में सैनिकों के बैठकर व लेटकर हथियार चलाने के लिए विशेष रूप से स्थान बने हैं। किले की लंबाई 88.5 मीटर और चौड़ाई 40 मीटर है। 8.9 फीट ऊंचाई वाली इस दीवार की चौड़ाई 5 फीट 4 इंच है। पत्थरों से निर्मित इस किले में गारे का प्रयोग किया गया है। किले में प्रवेश के लिए दो दरवाजे हैं।

बताया जाता है कि इस किले में एक गोपनीय दरवाजा भी था, लेकिन अब यह कहीं नजर नहीं आता। किले के अंदर लगभग 15 कमरे हैं। किले का मुख्य भवन दो मंजिला है। भवन के मुख्य भाग में बने एक कमरे की बनावट नेपाल में बनने वाले भवनों से मेल खाती है। कहा जाता है कि इस किले में गोरखा सैनिक और सामंत ठहरते थे। इस किले में एक तहखाना भी बनाया गया था। इसमें कीमती सामना और असलहे रखे जाते थे। किले में बंदी गृह और न्याय भवन भी निर्मित था। किले के अंदर कुछ गुप्त दरवाजे और रास्ते भी थे। इनका प्रयोग आपातकाल में किया जाता था। किले के भीतर ही सभी सुविधाएं मौजूद थीं। किले के भीतर एक कुंआ भी खोदा गया था। एक व्यक्ति के इसमें डूबकर मरने के बाद इसको बंद कर दिया गया और उस पर पीपल का एक पेड़ लगा दिया गया ।

1815 में अंग्रेजों ने किले का नाम रख दिया लंदन फोर्ट
संगोली की संधि के बाद 1815 में कुमाऊं में औपनिवेशिक शासन स्थापित हो गया और अंग्रेजों ने इस किले का नाम बाउलीकीगढ़ से बदलकर लंदन फोर्ट कर दिया। 1881 ईस्वी में इस किले में तहसील का कामकाज शुरू हुआ। वर्ष 1910-20 के बीच में अंग्रेजों ने किले की मरम्मत कराई। इसके बाद इस किले को उपेक्षित छोड़ दिया गया। आजादी के बाद तहसील प्रशासन ने अपने स्तर से परिसर में नए भवनों का निर्माण किया। इस निर्माण में किले के वास्तविक स्वरूप को नुकसान पहुंचा। 


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