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नेपाल: चुनाव आयोग ने धर्मनिरपेक्षता का हवाला देते हुए RPP पार्टी के विधान से हटाया 'हिंदू राज्य'


कमल प्रसाद घिमिरे
काठमांडू :
नेपाल के चुनाव आयोग ने लोकतंत्र और धर्मनिरपेक्षता का हवाला देते हुए राजशाही और हिंदू समर्थक राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (RPP) के विधान से 'हिंदू राज्य और राजशाही' जैसे अनुच्छेदों को हटाने का निर्णय लिया है। चुनाव आयोग को इस निर्णय की वजह से पार्टी के विरोध का सामना करना पड़ा है। उप प्रधानमंत्री और RPP के चेयरमैन कमल थापा ने विरोध दर्ज कराते हुए आयोग से अपने निर्णय को सही करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पार्टी के विधान से हिंदू राज्य और राजशाही से संबंधित धारा को हटाकर पार्टी से उसकी आत्मा ही छीन ली है। चुनाव आयोग ने शुक्रवार को पार्टी के विधान से 'हिंदू राज्य और राजशाही' की वकालत करने वाले अनुच्छेदों को हटाने का निर्णय लिया। आयोग ने इन धाराओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था और धर्मनिरपेक्षता की भावना के विपरीत करार देते हुए हटाने का निर्णय लिया।

RPP ने इस निर्णय को असंवैधानिक बताते हुए इसको कोर्ट में चुनौती देने का फैसला लिया है। पार्टी ने कहा 'हमारा संविधान हमें विचारधारा की स्वतंत्रता रखने की इजाजत देता है। ऐसे में आयोग द्वारा पार्टी के विधान से कुछ धाराओं को हटाना असंवैधानिक है। 2008 में जन आंदोलन के द्वारा राजशाही के खात्मे के बाद नेपाली संसद ने देश को धर्मनिरपेक्ष घोषित कर दिया था। इसके बाद से ही RPP ने नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए अभियान छेड़ रखा है। RPP के प्रवक्ता रोशन कार्की ने कहा कि RPP ऐसे किसी भी निर्णय को स्वीकार नहीं करेगी जो इसके प्रमुख आदर्श को माने से रोकता हो। हम आयोग से दोबारा निर्णय पर विचार करने का निवेदन करते हैं।' पार्टी ने साथ ही हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए देशव्यापी आंदोलन चलाने का फैसला किया है।


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