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तुर्की ने जबरन रोका देहरादून की गोरखा महिला का पार्थिव शव, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गोरखा समाज की गुहार


 दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज पोर्टल
देहरादून :
गोरखा समाज की महिला के पार्थिव शरीर को हिंदुस्तान वापस लाने के प्रयासों में तुर्की के इस्तांबुल एयरपोर्ट प्रशासन का बेहद असंवेन्दनशील आचरण देखने में आ रहा है। देहरादून के मशहूर गोरखा समाजसेवी सूर्यबिक्रम शाही की धर्मपत्नी रीता शाही का निधन 6 मार्च को डेनमार्क में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। उनके पार्थिव देह को भारत वापस लाने के लिए उनके पुत्र और बहू डेनमार्क से अपने देश निकल चुके है। लेकिन अब तक निधन के 9 दिनों बाद भी पार्थिव देह हिन्दू रीती रिवाजों के तहत अंतिम संस्कार से वंचित है। इस पूरे शर्मनाक घटना से गोरखा समुदाय बेहद आहत है। दुनियाभर में भारतीयों के लिए हर क्षण मदद करने वाली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से गोरखा समाज को शाही परिवार को अब न्याय की उम्मीद है। गौरतलब है कि रीता शाही 1996 से डेनमार्क के कोपेनहेगन शहर में ही कार्य कर रहे है। यहां तक कि उनको डेनमार्क की नागरिकता भी मिल चुकी थी। उनका पुत्र ब्रिटेन में नौकरी कर रहे है।

भारतीय गोरखा समाज पूरे घटनाक्रम से आहत
भारत से लाखों की संख्या में गोरख़ा समाज के लोगो रोजगार के लिए विदेश जाते है। जहां से हर साल अरबों डॉलर भारत भेजे जाते है, जो देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। अब इस तरह से असंवेदनशील घटनाक्रम ने देश के गोरखा समाज के ऊपर बहुत बुरा प्रभाव डाला है। तत्काल विदेश मंत्रालय को पूरे मामले का संज्ञान लेकर अतिशीघ्र गोरखा महिला का पार्थिव देह इस्तांबुल एयरपोर्ट से वापस हिंदुस्तान लाने के लिए कोशिशें करनी की पहल करनी चाहिए।

दस्तावेजों के पूर्ण होने पर भी तुर्की सरकार का अमानवीय व्यवहार
एक तरफ शौकाकुल शाही परिवार इस घटनाक्रम से उभरने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उनके परिवार की गोरखा महिला का पार्थिव देह विदेश के एयरपोर्ट में बेवजह काफी लंबे समय से रोके रखा जा रहा है। कोपेनहेगन से भारत वापस आते समय इस्तांबुल ट्रांजिट के लिए रुका हुआ था। परिवार वालों के संपर्क करने पर उनको बार-बार दस्तावेजों को हवाला देकर अपना पल्ला झाड़ा जा रहा है। शाही परिवार का कहना है कि सारे दस्तावेजी कार्यवाही नियमानुसार होने के बावजूद उन्हें मूल कारण नहीं बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार भारतीय दूतावास द्वारा जारी डैनिश भाषी दस्तावेजों को इस्तांबुल एयरपोर्ट प्रशासन अनुवाद करने की मांग की जा रही है।

तीन दिनों से बेटा-बहू दिल्ली एयरपोर्ट पर कर रहे इंतजार
डेनमार्क में अपनी माँ के साथ रहे और वर्तमान में ब्रिटेन में पत्नी के साथ काम कर रहे बेटे और बहू पिछले 3 दिनों से पार्थिव शरीर के इंतज़ार में दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में रुके हुए है। उनका इंतज़ार दिनों दिन बढ़ता ही चला जा रहा है। अपनी माँ की लाश का इंतजार कर रहा एक गोरखा युवक अब भारत सरकार से न्याय की आशा कर रहा है।

मशहूर गोरखा समाजसेवी है सूर्यबिक्रम शाही
देहरादून के चंद्रबनी क्षेत्र के निवासी सूर्यबिक्रम शाही उत्तराखंड के गोरख़ा समुदाय में एक लोकप्रिय नाम है। वह उत्तराखंड के राजनीतिक दल गोरखा डेमोक्रेटिक फ्रंट के अध्यक्ष रह चुके है। उसके अलावा वह भारत और नेपाल के मैत्रीपूर्ण संबंधों के पुरोधा व्यक्ति है।



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