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बिना शोरगुल मचाए नहीं मिलेगा गोरखालैंड, आंदोलन के अलावा दूसरा विकल्प नहीं : विमल गुरूंग


कालिम्पोंग : गोरखालैंड के लिए बिना शोरगुल मचाए कुछ मिलने वाला नहीं है। ये शरीर से किसी हिस्से को अलग करने के बराबर है। अपना अधिकार मांगने पर यहां पर अचड़ने पैदा की जा रही है। अब आंदोलन के अलावा कुछ नहीं हो सकता है। गुरूवार को वार्ड नंबर आठ में गुम्पा हट्टा परिसर में आयोजित शिलान्यास कार्यक्रम में जीटीए प्रमुख विमल गुरूंग ने यह बात कहीं। उन्होंने कहा कि मेरे पूर्वज डंबर सिंह गुरूंग एवं अडि बहादुर गुरूंग इस भूमि के लिए कुछ समर्पित करके जाते तो शायद गोरखा को ऐसे भिखारियों की तरह नौबत नहीं आती। खुद को गुरूंग कहने में शर्म आ रही है। हमारे ही संतान का लगा दाग धो रहा हूं। 

उन्होंने कहा कि जो लोग हमें शरणार्थी बनाने का प्रयास कर रहे है। उसके पीछे हमारे लोग दौड़ लगा रहे है। ममता सरकार बोर्ड बनाकर एवं डिजीटल राशन देकर गोरखा जाति को शरणार्थी बना रही है। टाइगर हिल्स दार्जिलिंग का दिल कहा जाता है। महाकाल डॉडा तथा सिंचेल धाम जैसे धार्मिक स्थल को लेकर मुख्यमंत्री राजनीति कर रही है। वह जगह जल स्त्रोत है। जिससे दार्जिलिंग के लोगों की प्यास बुझती है। पर्यटन के लिए यह अच्छी जगह है। यहां से हम लोगों का आय स्त्रोत जुड़ा है। लेकिन बंगाल सरकार वहां पर बड़ा भवन बनाकर उस धार्मिक स्थल पर दुर्गन्ध फैलाने का काम कर रही है।   

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