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2 साल पहले मुंबई में खोया 14 वर्षीय नेपाली बच्चा, कोलकाता में मिला अपने परिवार से


कोलकाता : 14 साल के एक नेपाली बच्चे विवेक खडका की कहानी ऑस्कर नॉमिनेड फिल्म लायन के किरदार सारू से मिलती जुलती है। सारू की ही तरह विवक को भी ट्रेन के सफर ने कोलकाता पहुंचा दिया जहां एक एनजीओ ने उसे बचाया और आखिरकार बुधवार को विवेक को उसके परिवारवालों से मिलवाया। विवेक के पिता प्रेम सिंह खडका ने जब 2 साल बाद अपने बेटे को देखा तो उनकी आंखों से आंसू रूकने का नाम नहीं ले रहे थे। प्रेम सिंह ने विवेक को सीने से लगाते हुए कहा, 'देखो तुम कितने लंबे हो गए हो। लेकिन तुम इतने दुबले क्यों हो गए। क्या तुमने ठीक तरह से खाना नहीं खाया। मुझसे वादा करो कि फिर कभी तुम घर छोड़कर नहीं जाओगे। जब से तुम गए हो, एक दिन भी ऐसा नहीं गुजरा जब तुम्हारी मां और दादी ने तुम्हारे लिए आंसू नहीं बहाया।'

2 साल पहले पश्चिमी नेपाल के दोती से चाचा के साथ पहुंचे मुंबई
2 साल पहले जब विवेक 12 साल का था तो पश्चिमी नेपाल के दोती जिले के सानागांव से एक चाचा के साथ मुंबई आ गया। मुंबई में सांता क्रूज में खाने की एक दुकान पर उसे काम मिल गया। कुछ महीने तक तो सबकुछ ठीक रहा लेकिन कुछ ही दिन बाद विवेक को अपने घर की याद आने लगी और वह उस दुकान से भाग निकला। वह सड़कों पर भटकता रहा क्योंकि उसे पता नहीं था कि कहां जाना है। इसी दौरान विवेक एक और नेपाली चाचा से टकरा गया जिसने उसे घर पहुंचाने का वादा और ट्रेन में अपने साथ बिठा लिया। लेकिन विवेक को उस व्यक्ति पर शक हुआ और वह उससे बचकर निकल गया। अगले दिन उस ट्रेन ने विवेक को हावड़ा स्टेशन पहुंचा दिया। स्टेशन पर विवेक ने कई लोगों से मदद मांगी ताकी उसे घर पहुंचाया जा सके लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की।

4 दिन तक एक चाय की दुकान पर काम किया
भूखे-प्यासे विवेक कोलकाता की सड़कों पर भटकता रहा और एक दिन मुचीपारा इलाके में पहुंचा। यहां उसने 4 दिन तक एक चाय की दुकान पर काम किया लेकिन तभी ऑपरेशन स्माइल के तहत हुई कार्रवाई में कोलकाता पुलिस और एक एनजीओ ने विवेक को वहां से बचाया। चूंकि विवेक अपने घर का पता भूल चुका था इसलिए एनजीओ ने सांता क्रूज के उस खाने की दुकान पर फोन कर विवेक के बारे में जानकारी जुटायी और उसके परिवार वालों से संपर्क किया। हालांकि तब तक विवेक के पिता प्रेम सिंह अपने बेटे को ढूंढने मुंबई के लिए निकल चुके थे। तभी उन्हें नेपाल कॉनसुलेट से फोन आया कि उनके बेटे का पता चल चुका है। बुधवार 15 मार्च को 2 साल बाद विवेक अपने पिता से मिल पाया।
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