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COVER STORY : आखिर इस बार मसूरी विधानसभा के गोरखा वोटर्स का किस तरफ रहेगा रुझान


दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज पोर्टल
मसूरी/देहरादून : राजधानी के बड़े एरिये को छूते हुए पांच विधानसभा क्षेत्र राजपुर रोड, सहसपुर दून कैंट, रायपुर व धनोल्टी से लगी बहुप्रतीक्षित मसूरी सीट का हर चुनाव में अपना अलग ही मिजाज-ए- राजनीतिक रहा है। वैसे कांग्रेस के लिए सुरक्षित समझी जाने वाली यह विधानसभा सीट में पिछले तीन चुनावों में जनता का मिजाज अंत तक लगातार बदलता हुआ दिखाई दिया है। उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से यहां से लगातार दो बार कांग्रेस से जोत गुनसोला और एक बार भाजपा से विवादों में बने रहने वाले गणेश जोशी काबिज रहे है। इस सीट पर देखा जाए तो मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच में ही है, लेकिन इस बार हालात कुछ अलग से है। दोनों राष्ट्रीय दलों के लिए निःसंदेह बागी उम्मीदवार वोट कुछ हजार वोट लेते हुए सारे जमी-जमाए समीकरणों को बदलने की भूमिका में नजर आ रहे है।

पृथक राज्य बनने के बाद वर्ष 2002 में सूबे के पहले उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में मसूरी सीट पर कांग्रेस ने कब्जा किया था। साल  2008 में नए परिसीमन के बाद दून शहर का एक हिस्सा भी मसूरी सीट से जुड़ गया। बस इसके बाद इस सीट का भूगोल पहाड़ और मैदान में बराबर फैल गई है। मसूरी सीट में कैंट के साथ-साथ कई पॉश इलाके भी आते हैं। इसके अलावा दूसरी ओर इस क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की तादाद के कारण इस सीट पर युवाओं की अच्छी खासी संख्या है। इस बार भी चुनाव में भाजपा ने मौजूदा विधायक गणेश जोशी को ही मैदान में उतारा है। गौरतलब है कि जोशी सेना में भी रहे है और इस विधानसभा क्षेत्र में करीब छह हजार सैन्य परिवार भी हैं।

कांग्रेस ने इस बार गोदावरी थापली पर जताया भरोसा
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने इस बार गोदावरी थापली पर भरोसा जताया है। गौरतलब है कि थापली ने पिछले चुनाव में कांग्रेस छोड़कर बागी प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस के ही जोत सिंह गुनसोला को हरवाकर अपनी ताकत का अहसास करा चुकी हैं। तब उन्होंने नौ हजार से अधिक  वोट हासिल किए थे, और इतने ही अंतर से गुनसोला ने यह कांग्रेसी सीट गंवाई थी। गोदावरी और जोशी के लिए इस सीट पर दोनों तरफ से बागियों के हल्लाबोल ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सबसे पहले भाजपा से बगावत कर चुके राजकुमार जायसवाल चुनाव मैदान में डटे हुए हैं जबकि कांग्रेस से पूर्व दर्जाधारी मंत्री रहीं सारिका प्रधान भी निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर ताल ठोक रही हैं। सारिका वर्तमान में गोर्खाली सुधार सभा की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष है।

तीन गुटों में बंटते नजर आ रहे है क्षेत्र के 30 हजार गोरखा वोटर्स
अब इस क्षेत्र की 30 हजार गोरखा वोटर्स तीन गुटों में बंटते हुए नजर आ रहे है। सबसे पहले गोर्खाली प्रत्याशी के तौर पर गोदावरी थापली के पास गोर्खाली समाज की महिला संगठनों के साथ साथ गोरखा आर्मी ऑफिसर्स के एक धड़े का तगड़ा समर्थन हासिल है। वहीं दूसरी तरफ सारिका प्रधान भी गोर्खाली सुधार सभा की पदाधिकारी की हैसियत से गोरखा वोट बैंक को अच्छे खासे ढंग से अपने पाले में कर सकती है। वहीं भाजपा के गणेश जोशी को तमाम विवादों के बावजूद कई गोरखा आर्मी ऑफिसर्स के एक धड़ें के अलावा गोर्खाली समाज के भाजपा में शामिल युवा एवं अन्य कार्यकर्ताओं का समर्थन मिल सकता है। इसका सीधा-सीधा मतलब यह हुआ कि गोरखा वोटर्स की एक बड़ी शक्ति को इस बार बिखरने से बचाने के लिए गोदावरी को जोर लगाना पड़ सकता है।

नॉन गोरखा वोटर्स को भी रिझाने की थापली की कोशिश
पिछली बार गोदावरी थापली ने अपने नाम के मध्य में थापा लगाकर नामांकन दाखिल किया था लेकिन इस बार उन्होंने भी नॉन गोरखा वोटर्स को रिझाने के लिए केवल गोदावरी थापली के नाम से अपना नामांकन पर्चा भरा है।

शुरुआती पोल सर्वें में गोदावरी को बढ़त
हालांकि शुरुआती पोल सर्वें में गोरखा समुदाय के द्वारा गोदावरी को बढ़त मिलता हुआ नजर आ रहा है। दूसरे नंबर पर गणेश जोशी और तीसरे नंबर पर सारिका प्रधान को भी गोरखा वोटर्स गोर्खाली सुधार सभा से जुड़े होने के कारण मिल रहा है। गौरतलब है कि इस सीट पर बसपा से अशोक पंवार व उक्रांद के जयप्रकाश उपाध्याय समेत कुल 12 प्रत्याशी मैदान में हैं।

( समस्त आंकड़े 8 जनवरी 2017 के 8 PM तक के है।)
 


मसूरी विधानसभा : एक नजर

मतदाता
कुल - 128387
पुरुष-67776
महिला-60608
अन्य : 3


पोलिंग बूथ
-164 पोलिंग

चुनाव आयोग को दी गई AFFIDAVIT की PDF

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