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भारतीय नागरिकता के बावजूद स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है नेपाली समाज : मेघराज कुंवर


हापुड़ : मूलप्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता समाज के संस्थापक मेघराज कुंवर ने बड़े तल्ख लहजे में अपने समाज की पीड़ा बताते हुए कहा कि नेपाली समाज के हजारों लोग जिले में अनेक सालों से निवास कर रहे हैं। रेस्टोरेंट से लेकर हाईवे किनारे चलने वाले ढाबों पर कड़ी मेहनत करके न सिर्फ लोगों को स्वादिष्ट व्यंजन परोस रहे हैं बल्कि अपने और अपने परिवार का भी पालन पोषण कर रहे हैं। अनेक समस्याओं से जूझ रहे इन लोगों के लिए किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा कभी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। भारतीय नागरिकता होने के बावजूद अपने आप को उपेक्षित महसूस करने वाले नेपाली समाज के लोग अन्य भारतीय नागरिकों की तरह अपने लिए भी समान अधिकारों की मांग कर रहे हैं।

सालों से भारत में रहने के बावजूद उनके साथ दोयम दर्जे के नागरिक सरीखा देखा जाता है। न उनके पास रहने को छत हैं और न ही कोई स्थाई काम है। कभी यहां तो कभी वहां काम करके किसी तरह अपना गुजारा करने को मजबूर हैं। दुख इस बात का है कि हमने तो भारत को दिल से अपना लिया, लेकिन यहां के जनप्रतिनिधियों और निवासियों ने उन्हें पूरी तरह से नहीं अपनाया है। 
- मेघराज कुंवर,  मूलप्रवाह अखिल भारत नेपाली एकता समाज के संस्थापक

उपेक्षा के चलते आज तक उनकी समस्याओं को किसी ने जानने तक की कोशिश नहीं की है। शासन तो उनकी समस्याओं को लेकर मूक दर्शक बना हुआ है ही,लेकिन जनप्रतिनिधियों को तो चुनाव के दौरान भी उनकी याद नहीं आती। हालांकि उनके पास मतदाता पहचान पत्र से लेकर आधार कार्ड तक है और वे मतदान में भी हिस्सा लेती हैं। - गीता गिरी

जनप्रतिनिधि वोट मांगने के लिए आते भी हैं। लेकिन उनकी समस्याओं की ओर कोई ध्यान नहीं देता हैं। राशन कार्ड बनवाने तक के लिए भटकना पड़ता है। चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधियों को भी नेपाली समाज की समस्याओं की ओर ध्यान देना चाहिए। मूलभूत सुविधा भी नहीं मिल रही है। -  सुशीला
 
साल में छह माह ही रोजी रोटी का इंतजाम हो पाता है। शेष छह माह काम तलाशने के लिए कभी दिल्ली तो कभी किसी दूसरे शहर में भटकना पड़ता है। कुछ ज्यादा नहीं तो कम से कम उनके लिए काम का प्रबंध तो किया जाना चाहिए ताकि वे अपना पेट भरने के लिए किसी के सामने हाथ न फैला सकें। - गणेश बोहरा

 
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