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नेपाल में स्थित भारतीय राजदूत रंजीत रे बोले भारत और नेपाल दो देश है लेकिन आत्मा एक


काठमांडू / सोनौली : भारत और नेपाल दो देश है लेकिन दोनों की आत्मा एक है इस रिश्ते को किसी ने बनाया नहीं है तो बिगाड़ भी नहीं सकता। भारत और नेपाल का खुला बॉर्डर है किसी और देश के साथ ऐसा संबंध नहीं है। यह बातें सम्मान एवं विदाई समारोह को संबोधित करते हुए नेपाल में स्थित भारतीय राजदूत रंजीत रे ने कही। उन्होंने कहा हमारे सम्बंध नदी नाले हिमालय पहाड़ तक से है। नेपाल में स्थिरता होगी तभी भारत में विकास होगा। हमारा लक्ष्य सबका साथ सबका विकास है। नेपाल में शांति के लिए हमेशा से भारत की भूमिका रही है। हम हमेशा नेपाली जनता का समर्थन करते हैं। गरीबी और अशिक्षा को दूर करने का प्रयास होता रहा । हर देश की अपनी सोच है प्रगति करने की हमारे दोनों देशों में प्रगति के प्रयाप्त से अधिक श्रोत है। उन्होंने नेपाल में भारत के सहयोग से चल रहे तमाम बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यापारिक संबंध दोनों देशों के संबंध को मजबूत करते हैं । भारत नेपाल का खुला बॉर्डर संबंधों को और मजबूत करता है । बौद्धिस्ट सर्किट बनाने पर कार्य करना होगा । भारत से टूरिस्ट वीजा शुरू हो गया है।
 
रे का दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने में रही सराहनीय भूमिका
नेपाल के पुर्व मंत्री हृदेश त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय राजदूत रंजीत रे का दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने तथा उसे आगे बढाने मे अहम तथा सराहनीय भूमिका रही है। नेपाल भारत की खुली सीमा में कोई रुकावट आवे इसे हम बर्दाश नहीं कर सकते। तराई मधेश को बिना साथ लिए कोई कुछ नहीं कर सकता है। सीमा नियंत्रण के नाम पर बार्डर बंद का प्रयास किया गया तो बर्दाश नहीं होगा। श्री रंजीत रे का कार्य उल्लेखनीय और अनुकरणीय है।

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