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EXCLUSIVE : मसूरी विधानसभा से निर्दलीय सारिका बोली - गोदावरी गोरखा नहीं, मैं हूँ असली गोरखा बेटी


दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
देहरादून :
मसूरी विधानसभा चुनाव में गोरखा समाज की लाख कोशिशों के बावजूद अब इस चुनाव में दो-दो गोरखा महिला प्रत्याशी चुनाव मैदान में एक दूसरे के खिलाफ लड़ते हुए नजर आएंगे। राजधानी के गोरखा समुदाय से एक तरफ कांग्रेस की गोदावरी (थापा) थापली और दूसरी ओर कांग्रेस की बागी सारिका प्रधान चुनाव में एक दूसरे को चुनौती देते हुए नजर आएंगे। वीर गोरखा से बात करते हुए निर्दलीय प्रत्याशी सारिका प्रधान ने कहा कि मसूरी क्षेत्र के गोरखा समाज को गोरखा नाम लेकर भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने सीधे-सीधे गोदावरी (थापा) थापली पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस ने उन्हें नॉन गोरखा कैंडिडेट के तौर पर टिकट दिया है, ना कि गोरखा कैंडिडेट समझकर दिया है। 

सारिका प्रधान ने स्पष्ट शब्दों में कहा- गोदावरी थापली की जगह अगर गोदावरी थापा यहां से चुनाव लड़ती तो वह अपना नाम बिना शर्त वापस लेने सोचती लेकिन अब लड़ाई असली गोरखा और नकली गोरखा के बीच की है। गौरतलब है कि चुनाव के लिए नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख मंगलवार 31 जनवरी 2017 है। उन्होंने आगे बात करते हुए कहा कि गोरखा समाज को मूर्ख बनाने और गोरखा समाज के नाम पर राजनीति करने वालों को सबक सिखाने के किए वह इस बार चुनाव मैदान में उतरी है। नामांकन वापस नहीं लेने के सवाल पर सारिका ने कहा कि गोरखा समाज के हित को देखते हुए उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे है। उन्होंने इस चुनाव में स्वयं को गोरखा समुदाय की लोकप्रिय नेता बताया।

वहीं दूसरी तरफ गोदावरी (थापा) थापली ने भी इस मुद्दे पर वीर गोरखा से बात करते हुए कहा कि मसूरी की जनता बता देगी कि कौन असली है और कौन नकली। उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने गोरखा मां के कोख से जन्म लिया है और वह शत प्रतिशत गोरखा है। इस बात का जवाब उनके साथ खड़ी गोरखा समुदाय भी बड़ी तादाद में उन्हें जितवाकर दे देगी। साथ ही उन्होंने गोरखा समाज में इस तरह की खबरों के आने पर दुःख जताते हुए कहा कि राजनीति का स्तर गिरने नहीं देना चाहिए।

वहीं इस मसूरी विधानसभा सीट से 2012 में चुने गए विधायक गणेश जोशी का कहना है कि गोरखा समाज के कतिपय लोग, जो गोरखा समुदाय का भला नहीं चाहता वह इस चुनावी सीजन में रोटी सेंकने की कोशिश कर रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि गोरखा बहुल मसूरी में उनको गोरखा समाज का जबरदस्त साथ मिल रहा है। उन्होंने इस सीट से अपनी सीट सुनिश्चित होना बताया।

'गोरखा एकता मंच' ने दिया था गोदावरी को बिना शर्त समर्थन
विधानसभा चुनाव की घोषणा से पहले देहरादून के गोरखा समुदाय की हाल ही में ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) पूरन सिंह गुरुंग के नेतृत्व में  बनी एकीकृत संस्था 'गोरखा एकता मंच' ने गोदावरी थापा थापली को सर्वमान्य तौर पर चुनाव में विजयी बनाने के लिए अपना बिना शर्त समर्थन दिया था।

मुझे सभी सभी समुदाय का सहयोग है : जोशी  
गणेश जोशी ने भी वीर गोरखा से बात करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता होने के नाते मैंने कभी भी जातिगत आधारित राजनीति नहीं की है। नेपाल में आए हुए भीषण भूकंप के बाद मैंने देहरादून से आपदा के बाद बहुत सारे काम करवाए थे। क्षेत्र की सभी समुदाय के साथ गोरखा समाज भी जातिगत राजनीति को पीछे छोड़कर क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखकर मुझे पूरा सहयोग दे रहे है। 

गोरखा वोट के विभाजन के चलते गोरखा मतदाता पशोपेश में
देहरादून के 6 विधानसभा सीट में से केवल मसूरी में गोरखा कैंडिडेट को राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस का टिकट मिला है। इसके बाद गोरखा समुदाय ने भी अपनी समाज की बेटी गोदावरी (थापा) थापली के सपोर्ट में एकजुटता दिखाई थी। लेकिन अब समाज की ही अन्य गोरखा महिला सारिका प्रधान के निर्दलीय इसी विधानसभा से चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद मसूरी में गोरखा वोटों का समीकरण तेजी से बदलने लगा है। सारिका प्रधान वर्तमान में गोरखा समाज के मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित गोर्खाली सुधार सभा की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष भी है। इसके कारण गोरखा समाज के कई पुराने वोटर्स सभा के व्यक्ति का समर्थन करते हुए नजर आ जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।


मसूरी में एकतरफा जीत सुनिश्चित करते है गोर्खाली मतदाता
मसूरी विधानसभा क्षेत्र में गोर्खाली मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है और इनका वोट बैंक चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाता है। मसूरी विधानसभा के कुल मतदाताओं में से एक चौथाई मतदाता गोर्खाली समाज से ही आते हैं और ये जिसके भी पक्ष अपना मतदान करते हैं उसकी एकतरफा जीत सुनिश्चित हो जाती है। यही कारण है कि विधानसभा चुनाव में हर एक प्रत्याशी गोर्खाली समुदाय को अपने पक्ष में करने का भरसक प्रयास करता है। 2012 के विधानसभा चुनाव में गोर्खाली वोटबैंक के दम पर ही बीजेपी प्रत्याशी गणेश जोशी ने जीत दर्ज की थी. थी। लेकिन इस बार कांग्रेस की प्रत्याशी गोदावरी (थापा) थापली खुद गोर्खाली है। अब सभी लोगों के मन में यही सवाल उठ रहा है कि इस बार के चुनाव में गोर्खाली समुदाय किसके पक्ष में अपना मत करेगा। कांग्रेस की गोदावरी (थापा) थापली के साथ गोर्खाली समुदाय जायेगा या फिर बीजेपी के गणेश जोशी के साथ देगी। 

भाजपा-कांग्रेस की लड़ाई में रूका मसूरी का विकास : अशोक पंवार
मसूरी के बसपा प्रत्याशी अशोक पंवार ने भी कहा कि दोनों कांग्रेस और भाजपा के आपसी लड़ाई के चक्कर में मसूरी का विकास रूक गया है। उन्होंने कहा कि गणेश जोशी कहते है कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने मसूरी का विकास नहीं किया तो वही कांग्रेस सरकार कह रही है कि गणेश जोशी कुछ नहीं कर पाये। उन्होंने कहा कि दोनों ने ही मसूरी की जनता को गुमराह कर अपनी जेब भरने का काम किया है। उन्होंने कहा कि इस बार जनता बसपा को वोट देगी और पहाड़ में हाथी को चढ़ाने का काम करेगी। 


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