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मसूरी: सारिका प्रधान का निर्दलीय चुनाव लड़ने का एलान, गोरखा वोट बंटने का ख़तरा बढ़ा


दीपक राई
वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क
देहरादून।
कांग्रेस पार्टी में अभी भी टिकट बंटवारें को लेकर पार्टी के पुराने सदस्यों के बगावती तेवर जारी है। इसे क्रम में पूर्व राज्यमंत्री  और गोर्खाली सुधार सभा की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष सुश्री सारिका प्रधान ने भी बगावती तेवर दिखाते हुए कांग्रेस पार्टी को अलविदा कह दिया है। इसके साथ ही सारिका ने मसूरी विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ने का एलान भी किया है। उन्होंने वीर गोरखा न्यूज पोर्टल से बात करते हुए बताया कि कांग्रेस पार्टी ने टिकट देने का वादा करने के बावजूद उनके साथ इन वक्त में विश्वासघात किया है। सारिका प्रधान ने अब खुली चुनौती देते हुए कहा कि इस विधानसभा क्षेत्र में असली गोरखा उम्मीदवार होने का दावा करते हुए गोर्खाली समाज के अधिक से अधिक वोट और समर्थन मिलाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने अपनी दावेदारी को जनता के आग्रह के कारण उठाया हुआ कदम बताया। वह नामांकन के अंतिम दिन 27 जनवरी को अपने समर्थकों के साथ निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर अपनी दावेदारी पेश करेगी।

गोर्खाली टोपी के निःशुल्क वितरण अभियान से मिली शोहरत
वर्तमान में गोर्खाली सुधार सभा की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष सारिका प्रधान विगत कई वर्षों से शहर में गोर्खाली टोपी के निःशुल्क वितरण अभियान के कारण सुर्ख़ियों में रही है। समाज में एकता लाने के उद्देश्य से वह अपने इस अभियान में अब तक हजारों की संख्या में निःशुल्क गोर्खाली टोपी का वितरण समुदायों के बीच कर चुकी है।

गोर्खाली समाज में वोट के विभाजन का ख़तरा बढ़ा
मसूरी विधानसभा में अब एक और गोरखा उम्मीदवार के निर्दलीय चुनाव लड़ने की खबर से कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टी में खलबली मचनी तय है। कांग्रेस की टिकट से चुनाव मैदान में खड़ी पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोदावरी (थापा) थापली को नामांकन भरने के दौरान गोर्खाली समाज का जबरदस्त समर्थन मिला था। वहीं गोरखा बहुल क्षेत्र में दोनों बेटियों के मैदान में होने से गोर्खाली समाज में भी अब वोट के विभाजन का ख़तरा बढ़ गया है। प्रदेश की सियासत से विधानसभा में पहली गोर्खाली विधायक होने सारिका की चुनाव लड़ने की घोषणा ने एक नई परेशानी खड़ी कर दी है।

गणेश जोशी से गोरखा वोट का छिटकना तय
दूसरी तरफ भाजपा के प्रत्याशी गणेश जोशी को गोरखा समाज का लंबे समय से समर्थन मिलता रहा है। अब उनके सामने भी गोरखा वोट छिटकता हुआ दिखाई दे रहा है। हाल फिलहाल शक्तिमान घोड़े और रॉबर्ट वाड्रा के विवाद के कारण उनका वोट बैंक भी अब पहले जैसा मजबूत नहीं रह गया है। गोदावरी (थापा) थापली से उन्हें बहुत कठिन चुनौती मिल रही है। गोदावरी को इस समय क्षेत्र की महिलाओं का शानदार समर्थन मिल रहा है। 


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