Header Ads

दार्जिलिंग की गोरखा गर्ल ने गरीब नेपाली युवतियों की तस्करी करने वाले वॉन्टेड गैंग को पकड़वाया


रायटर्स 
दार्जिलिंग : 17 साल की शिवानी गोंड और 18 साल की गोरखा गर्ल तेजस्विनी प्रधान ने वह काम कर दिखाया, जिसे करने में अच्छे अच्छों के पसीने छूट जाते हैं. उनकी बहादुरी ने युवतियों को देह व्यापार में धकेलने वालों को गिरफ्तार कराया. 17 साल की शिवानी और 18 साल की तेजस्विनी ने वह काम कर दिखाया, दार्जिलिंग की इन दोनों लड़कियों ने भारत और नेपाल की गरीब युवतियों की तस्करी करने वाले गैंग को पकड़वाया. फेसबुक के जरिये शिवानी गोंड और तेजस्विनी प्रधान ने तस्करों से दोस्ती की. धीरे धीरे संपर्क बढ़ता गया. फोन पर बातचीत भी हुई. दोनों लड़कियों ने तस्करों को भरोसा दिला दिया कि वे घर से भागने के लिए तैयार हैं. तस्कर हरकत में आ गए. उन्हें लगा कि दो नई लड़कियां उनके हाथ लग रही हैं. लेकिन उन्हें यह पता नहीं था कि शिवानी और तेजस्विनी एक पुलिस ऑपरेशन के लिए काम कर रही हैं.

शिवानी के मुताबिक, "जब हमने उनसे बात की तो उन्होंने खुलकर हमें बताया कि हमें मेहमानों की सेक्स जरूरतें पूरी करनी होंगी. उन्होंने हमारी तस्वीरें भी मांगीं. वे सुनिश्चित करना चाहते थे कि हम दिखने में सुंदर हैं. मैं फोटो देने में थोड़ा घबराई लेकिन फिर हमने वही किया जो उन्होंने कहा क्योंकि हमें उन्हें भरोसे में लेना था." आम तौर पर पुलिस के लिए ऐसे तस्करों को पकड़ना आसान नहीं होता. पुलिस को लोगों की मदद की जरूरत पड़ती है. शिवानी की मां को इसका अंदाजा था. वह कहती हैं, "पहले मैं भी हिचकिचायी, लेकिन फिर मुझे लगा कि तस्करों तक पहुंचने के लिये हमारे पास यही एक रास्ता है."

फेसबुक पर चैट और फोन पर बातचीत करने के बाद पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी से एक महिला शिवानी और तेजस्विनी को लेने आई. पुलिस ने उस महिला को रंगे हाथ दबोच लिया. इस दौरान नेपाल से लापता हुई एक युवती भी मिली. जांच आगे बढ़ी तो लड़कियों की तस्करी करने वाला पूरा गैंग और एक मुख्य संदिग्ध भी हाथ लगा. संदिग्ध की दिल्ली में भी तलाश हो रही थी. अब शिवानी और तेजस्विनी को गणतंत्र दिवस के दिन बहादुरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सम्मानित करेंगे. बहादुरी पुरस्कार के लिए पूरे भारत से 25 बच्चों को चुना जाता है. उन्हें मेडल, सर्टिफिकेट और इनामी धनराशि दी जाती है. सरकार ऐसे बच्चों की पढ़ाई का खर्च भी उठती है.

सरकारी आकंड़ों के मुताबिक 2015 में तस्करों ने जितनी महिलाओं को फंसाया, उनमें से 52.8 फीसदी नाबालिग थीं. नाबालिगों की संख्या में यह 35.4 फीसदी इजाफा था. तस्करी के मामले में पश्चिम बंगाल भी भारत के टॉप-3 राज्यों में है. तस्कर अक्सर गरीब लड़कियों को अच्छी नौकरी का झांसा देते हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक इसके बाद तस्कर इन युवतियों को देह व्यापार या फिर घरेलू कामकाज में धकेल देते हैं. अक्सर तस्कर महिलाओं को उनके घर से हजारों किलोमीटर दूर दिल्ली या दूसरे महानगरों में पहुंचा देते हैं, जहां से बिना मदद के वापस लौटना उनके लिए नामुमकिन सा होता है.

Powered by Blogger.