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भारत की नोटबंदी से नेपाल का आर्थिक संकट बरकरार, नहीं निकल रहा कोई हल



काठमांडू : भारत में हुई नोटबंदी के कारण नेपाल में गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। इसके असर और परेशानियों से उसे अभी भी दो-चार होना पड़ रहा है। नेपाल राष्ट्रीय बैंक (NRB) और भारत के वित्त मंत्रालय व विदेश मंत्रालय के बीच पिछले हफ्ते हुई बैठक बेनतीजा रही। नेपाल की मुश्किलों को इस बैठक से कोई राहत नहीं मिली। NRB की ओर से आई टीम का नेतृत्व चिन्तामणि सिवाकोटी कर रहे थे। बैठक में नोटबंदी के कारण पैदा हुए संकट से निपटने को लेकर विमर्श किया गया। नेपाली अधिकारियों का कहना है कि नोटबंदी के कारण स्थिति और गंभीर होती जा रही है।

भारत द्वारा 8 नवंबर को 500 और 1,000 के नोटों को अमान्य किए जाने की घोषणा का असर नेपाल पर भी पड़ा है। नेपाल को भारत के इस फैसले का बहुत नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद केंद्र सरकार की ओर से नेपाल की परेशानियों को कम करने की कोशिशें गंभीर नहीं दिख रही हैं। सरकार की ओर से नेपाल में पैदा हुए आर्थिक संकट को कम करने और राहत देने की कोशिशों को वरीयता नहीं दी जा रही है। भारत में नेपाल के राजदूत दीप कुमार उपाध्याय ने बताया, 'नेपाल हर साल करीब 600 करोड़ भारतीय रुपये भारत से खरीदता है। भारत हमें चार किश्तों में यह रकम देता है। पिछले कुछ महीनों के दौरान भारत की ओर से नेपाल को कोई पैसा नहीं दिया गया। इससे हमें बहुत परेशानी उठानी पड़ रही है।'

पिछले हफ्ते भारतीय रिजर्व बैंक ने 100 करोड़ रुपये काठमांडू भेजे थे। नेपाल के विदेश मंत्री प्रकाश शरण माहत इस हफ्ते भारत आ रहे हैं। वह यहां रायसीना डायलॉग में भाग लेंगे। यह भारत सरकार का विदेशी नीतियों से संबंधित बेहद कार्यक्रम है। उम्मीद है कि नेपाली विदेश मंत्री भारत से नोटबंदी के कारण पैदा हुई मुश्किलों का हल निकालने की अपील करेंगे। नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने इस मुद्दे पर नवंबर में PM मोदी से बातचीत की थी। दिसंबर में नेपाल राष्ट्रीय बैंक के अधिकारियों ने कहा कि जबतक इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाला जाता, तबतक नेपाल में भारतीय मुद्रा के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

नेपाल में भारतीय मुद्रा हालांकि कानूनी तौर पर मान्य नहीं है, लेकिन इसका वहां जमकर इस्तेमाल होता है। नेपाली नागरिकों के पास बड़ी संख्या में 500 और 1,000 के भारतीय नोट हैं। भारत सरकार को ये पैसे वापस लेकर उन्हें नई मुद्रा देनी होगी। इस दिशा में सबसे बड़ी परेशानी नकली नोटों की है। भारत के साथ सीमा सटी हुई होने के कारण बड़ी संख्या में नकली नोट नेपाल के रास्ते भारत में आते हैं। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की ओर से जहां भारत में डिजिटल और कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने की काफी कोशिश की जा रही है, वहीं नेपाल में इस तरह का कोई प्रयास नहीं किया गया है। बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक भारत में काम करते हैं। ये लोग नेपाल में रह रहे अपने परिवार वालों को भारत से जो पैसे भेजते हैं, वह नेपाली अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम है। साल 2016 में यह रकम करीब 44 अरब रुपये थी। नेपाल की कुल GDP का यह लगभग 2.6 फीसद हिस्सा है।

- NBT

 
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