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भारत से 12 हजार से ज्यादा नेपाली लड़कियों को वेश्यावृति से निकाल चुकी है 'पद्मश्री' अनुराधा कोईराला


रायटर
नई दिल्ली / काठमांडु।
भारत और नेपाल की मित्रता को प्रगाढ़ करते हुए भारत के सबसे प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में से एक 'पद्मश्री' के लिए चुनी गईं 67 वर्षीय नेपाली महिला अनुराधा कोईराला को यह पुरस्कार हजारों युवतियों को यौन दासता से बचाने और मुक्त कराने के लिए दिया गया है। उन्होंने देह व्यापार के लिए तस्करी कर ले जाई गईं 12 हजार पीड़िताओं को न सिर्फ मुक्त कराया बल्कि उनका पुनर्वास भी कराया। साथ ही 45 हजार लड़कियों को उन्होंने तस्करी होने से बचाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वयं अपने वेबसाइट पर अनुराधा समेत सभी 89 पद्म पुरस्कार विजेताओं के नाम और उनकी उपलब्धियों का उल्लेख किया गया है। फोन पर अनुराधा ने बताया, 'जब मैं उनकी मानसिक और शारीरिक पीड़ा को देखती थी तो मुझे बेहद तकलीफ होती थी। मैं इससे मुंह नहीं मोड़ सकती थी। इसी से मुझे इस अपराध से लड़ने और जड़ से उखाड़ फेंकने की ताकत मिली। यह पुरस्कार मिलने की घोषणा से मैं उत्साहित हूं और मैं लड़कियों को देह व्यापार के दलदल में लाने और बेचे जाने को रोकने के लिए और कठिन परिश्रम करूंगी।'

दरअसल, अनुराधा 'माईती' (नेपाली में इसका अर्थ है- मां का घर) नामक एक धर्मार्थ संस्था चलाती हैं। 1993 में इस संस्था की स्थापना के लिए उन्होंने शिक्षक के रूप में अपना दो दशक का करियर भी छोड़ दिया था। पिछले 24 सालों में 'मैती' ने काठमांडु में आश्रय घर, नेपाल-भारत सीमा पर 11 ट्रांजिट होम्स, तीन प्रिवेंशन होम्स, दो अस्पताल और एक स्कूल की स्थापना की है। प्रिवेंशन होम्स में सर्वाधिक प्रभावित लड़कियों को काउंसलिंग के साथ-साथ सिलाई और मोमबत्ती बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। जबकि, संस्था के स्कूल में करीब एक हजार बच्चों को शिक्षा प्रदान की जाती है।

दिज्जू (नेपाली में इसका अर्थ है- बड़ी बहन) के नाम से लोकप्रिय अनुराधा को उनके कार्यों के लिए संयुक्त राष्ट्र समेत दुनियाभर के कई पुरस्कार और सम्मान प्रदान किए जा चुके हैं। उनका कहना है कि जब तक परिवार अपने बेटे और बेटियों के साथ एक समान व्यवहार नहीं करेंगे तब तक तस्करी और दासता को खत्म कर पाना बेहद कठिन है।

प्रसिद्ध समाजसेवी तथा माइती नेपालकी संस्थापक अध्यक्ष हुन्
अनुराधा कोइराला प्रसिद्ध समाजसेवी तथा माइती नेपालकी संस्थापक अध्यक्ष हुन्। उनले आफ्नो माइती नेपाल नामक गैरसरकारी संस्था मार्फत बेचिएका चेलीबेटीको उद्वार गरेकी छिन्। खासगरी भारतीय कोठीहरूमा बेचिएर नारकीय जीवन विताउन वाध्य भएका नेपाली चेलीबेटीहरूको उद्वार तथा पुनर्स्थापनामा उनको संस्था कृयाशील छ। यिनले २०१० CNN Hero को उपाधि पनि पाएकी छिन्। अनुराधाको जन्म १४ अप्रिल १९४९ मा ओखलढुङ्गा जिल्लाको रुम्जाटारमा गुरुङ परिवारमा भएको हो। उनका बाबु कर्णेल प्रताप शिंह गुरुङ र आमा लक्ष्मी गुरुङ हुन। १० कक्षासम्म भारतको कालिम्पोङमा अध्ययन गरेकी उनले भारतकै कोलकाताबाट बीए पास गरेकी छन्। चार जना दाजुभाइ र दुई दिदी बहिनीमध्येकी उनी काँइली हुन्। १९ वर्षे किशोर उमेरमा काठमाडौंका दिनेशप्रसाद कोइरालासँग वैवाहिक बन्धनमा बाँधिएकी अनुराधाका एक मात्र छोरा मनीष कोइराला पनि 'प्रयास नेपाल' नामको गैरसरकारी संस्था चलाउँदै आएका छन्।

मान तथा सम्मान
कोइरालाले क्यालिफोर्नियाको लसएन्जलसमा CNN हिरो उपाधी जितेकी छिन्। उनलाई डेमी मुर र एस्टन कचरले मञ्चमा संयुक्तरुपमा चिनाएका थिए। कोइरालाई माइती नेपालको आफ्नो कार्यक्रम जारी राख्न अमेरिकी डलर १००,००० को साथमा अमेरिकी डलर २५,०० कदर स्वरुप सिएनएन द्वारा प्रदान गरियो। उनले २०१४ मा मदर टेरेसा सम्मान जितिन्।

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