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सरदारों के बाद नेपाली समुदाय भी मजाक बंद कराने के लिए पहुंचे सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली। ऐसे समय में जब सुप्रीम कोर्ट सिखों पर बनने वाले चुटकुले रोकने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है, नेपाली समुदाय के दो छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने मांग की है कि सरकारी, गैरसकारी एजेंसियों तथा व्यक्तियों को नेपाली बोलने वाले समुदाय के आत्मसम्मान और गरिमा को चोट पहुंचाने से रोका जाए। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इस मामले को सरदारों पर चुटकुले रोकने लिए दायर याचिका के साथ ही सुनवाई करने का आदेश दिया है। नेपाली विधि छात्र अक्षय के प्रधान ने यह याचिका अक्तूबर में दायर की थी। 

वह नोएडा के एक लॉ कालेज में पांचवें वर्ष के छात्र हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने सरदारों पर जोक्स रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रखी है जिस पर कोर्ट सुनवाई कर रहा है। याचिका पर खुद बहस करते हुए प्रधान ने कहा कि नेपाली लोग इस देश के संविधान और देश के प्रति बहुत आस्था रखते हैं। उन्होंने कहा कि गोरखा शब्द, नेपाली टोपी और खुखरी उनके लिए बेहद सम्म्मानित, धार्मिक सांस्कृतिक और सामाजिक प्रतीक हैं लेकिन फिल्मों और विज्ञापनों में उन्हें बहुत ही खराब तरीके से दिखाया जाता है। नेपाली या गोरखों को ऐसे प्रदर्शित किया जाता है जैसे कि वे बुद्धिहीन, बिना दिमाग वाले लोग हैं जो सिर्फ दूसरे लोगों के दरवाजे पर खड़े होने के योग्य ही हैं। इस मामले की सुनवाई जनवरी के पहले हफ्ते में होने की संभावना है।



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