Header Ads

RIO OLYMPIC : भारत की झोली में आया पहला मेडल, कुश्ती में साक्षी मलिक ने जीता कांस्य पदक


रियो डी जनीरो :  ओलिंपिक के 12वें दिन फ्रीस्टाइल कुश्ती के 58 किलोग्राम भारवर्ग में भारत की साक्षी मलिक ने किर्गिस्तान की एसुलू तिनिवेकोवा को 8-5 से हरा कर कांस्य पदक पर कब्जा कर लिया। आपको बता दें कि क्वॉर्टरफाइनल में साक्षी को हराने वाली रूस की पहलवान कोबलोवा झोलोबोवा वालेरिया के फाइनल में प्रवेश करने के कारण साक्षी को कांस्य पदक के लिए रेपेचेज मुकाबले में हिस्सा लेने के मौका मिला था। कांस्य पदक के लिए साक्षी को दो मुकाबलों में जीत दर्ज करनी थी। साक्षी ने दोनों ही मुकाबलें में जीत दर्ज कर भारत की झोली में पहला मेडल डाल दिया। गौरतलब है कि बीजिंग ओलिंपिक में इसी तरह रेपेचेज राउंड में जीत हासिल कर सुशील कुमार ने कांस्य पदक जीता था। रेपेचेज राउंड में साक्षी का पहला मुकाबला मंगोलिया की ओरखोन पुरेवदोर्ज से हुआ। मुकाबले के पहले हाफ में साक्षी ने शुरुआत से ही 2 अंको की बढ़त ले ली। हालांकि कुछ ही देर में ओरखोन ने शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को 2-2 की बराबरी पर ला दिया। लेकिन दूसरे हाफ में साक्षी ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ओरखोन को 12-3 से हराकर मुकाबला अपने नाम कर लिया।

दूसरे मुकाबले में साक्षी मलिक का सामना किर्गिस्तान की पहलवान एसुलू तिनिवेकोवा से हुआ। एसुलू ने शुरुआत से ही साक्षी पर दवाब बनाते हुए पहले राउंड की समाप्ति तक 5 पॉइंट की बढ़त ले ली। लेकिन दूसरे राउंड में शानदार वापसी करते हुए साक्षी ने इस अंतर को 4-5 तक पहुंचाया। उसके बाद साक्षी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और मुकाबले को 8-5 से अपने नाम कर लिया। इसी के साथ भारत को पहला मेडल भी मिल गया। रियो में साक्षी मलिक ने पदक जीतकर इतिहास रच दिया। साक्षी ओलिंपिक में कुश्ती में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं। यह ओलिंपिक खेलों में भारत का महिला कुश्ती में पहला तथा कुल मिलाकर पांचवां पदक है। भारत को ओलिंपिक गेम्स में कुश्ती में पहला पदक खशाबा जाधव ने दिलाया था, जब उन्होंने 1952 में हेलसिंकी में कांस्य पदक हासिल किया था। इसके बाद भारत को अपने अगले पदक के लिए 56 सालों तक इंतजार करना पड़ा था। भारत के इस इंतजार को सुशील कुमार ने खत्म किया था जब उन्होंने 2008 में बीजिंग ओलिंपिक में कांस्य पदक प्राप्त किया। 2012 में भारत ने कुश्ती में जबर्दस्त प्रदर्शन करते हुए दो पदक हासिल किए थे।

गौरतलब है कि इससे पहले साक्षी मलिक ने 58 किग्रा भारवर्ग के क्वॉलिफेकशन राउंड में स्वीडन की पहलवान मलिन जोहान्ना मैटसन को 5-4 से हराया था। मुकाबले से साक्षी को 3 क्लासिफिकेशन पॉइंट और इसानू को एक क्लासिफिकेशन अंक भी मिले थे। इसके बाद प्रीक्वॉर्टर फाइनल में उन्होंने तकनीकी अंकों के आधार पर मारियाना चेरदिवारा को हराया। दोनों के 5-5 अंक थे लेकिन लगातार चार अंक अर्जित करने के कारण साक्षी को विजेता घोषित किया गया। वहीं क्वॉर्टर फाइनल में साक्षी को रूस की वेलेरिया कोबलोवा ने एकतरफा मुकाबले में साक्षी को 9-2 से हराया था। इसी के साथ साक्षी गोल्ड और सिल्वर मेडल की दौड़ से बाहर हो गईं थीं।

रियो में साक्षी मलिक ने पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। साक्षी ओलिंपिक में कुश्ती में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बन गईं। यह ओलिंपिक खेलों में भारत का महिला कुश्ती में पहला तथा कुल मिलाकर पांचवां पदक है।

- साक्षी का जन्म 3 सितम्बर 1992 को हुआ था। पिता सुखबीर मलिक दिल्ली ट्रांसपॉर्ट कॉर्पोरेशन में कार्यरत हैं तथा उनकी मां भी सरकारी कर्मचारी हैं।

- साक्षी को 12 साल की उम्र से ही कुश्ती में दिलचस्पी थी। 2004 में उन्होंने ईश्वर दहिया का अखाड़ा जॉइन किया। फिलहाल दहिया का अखाड़ा छोटू राम स्टेडियम में है।

- दहिया के लिए लड़कियों को ट्रेनिंग देना आसान नहीं था। स्थानीय लोग अक्सर उनका विरोध करते रहते थे। लेकिन धीरे-धीरे समय बदला और फिर उनका अखाड़ा लड़कियों के लिए बेस्ट प्लेस बन गया।

- साक्षी के माता-पिता के अलावा उनके अलमा मेटर वैश पब्लिक स्कूल और वैश गर्ल्स कॉलेज ने उनकी बहुत मदद की।

- साल 2014 में हुए ग्लासगो कॉमनवेल्थ खेलों में 58 किग्रा वर्ग में साक्षी ने रजत पदक जीता था।

- साक्षी ने इसके बाद साल 2015 में दोहा में हुई सीनियर एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में 60 किग्रा में कांस्य पदक जीता था।

- जुलाई 2016 में उन्होंने स्पेनिश ग्रैंड प्रिक्स में कांस्य पदक जीतकर उन्होंने रियो ओलिंपिक के लिए अपनी तैयारी का नमूना पेश किया था।











Powered by Blogger.