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ओलंपिक : गोरखा पिस्टल किंग जीतू राई के निशाने पर इस बार 'मिशन गोल्ड'


असफलता से गुजरकर ही सफलता की मंजिल तय होती है। यह कहावत भारतीय निशानेबाज जीतू राई पर सटीक बैठती है। सेना में शूटिंग से जुड़ने की उनकी शुरुआत कुछ अच्छी नहीं रही। दो बार रिजेक्ट किए जाने के बाद तीसरी बार उन्हें कामयाबी मिली। आज 'पिस्टल किंग' के नाम से मशहूर जीतू रियो ओलंपिक में भारत की पदक की सबसे बड़ी उम्मीद बनकर उभरे हैं। वह ओलिंपिक में 50 मीटर फ्री पिस्टल वर्ग और 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में शिरकत करेंगे। साल 2014 के विश्व कप में लखनऊ रेजिमेंट की शान जीतू दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने थे। महू स्थित आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट के नायब सूबेदार जीतू इस समय विश्व रैंकिंग में 50 मीटर फ्री पिस्टल वर्ग में दक्षिण कोरिया के जिन जोंगहो के बाद दूसरे नंबर पर है, जबकि 10 मीटर एयर पिस्टल वर्ग में तीसरे नंबर पर हैं। शूटिंग में भारत को ज्यादा से ज्यादा सफलता दिलाने पर जीतू राई को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था।

जीतू का लखनऊ से है गहरा रिश्ता
नेपाल में जन्में जीतू का लखनऊ से गहरा रिश्ता है। वह 11वीं गोरखा रेजिमेंट में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। साल 2007 से 2011 के बीच लखनऊ कैंट में ही शूटिंग की प्रैक्टिस की। साल 2010 में उन्हें ट्रेनिंग के लिए चुना गया, लेकिन कमजोर प्रदर्शन के चलते उन्हें आर्मी यूनिट में वापस भेज दिया गया, जहां पर उनकी ट्रेनिंग बंद कर दी गई। शूटिंग की बारीकियां उन्होंने कोच गर्वजीत राई के अंडर में सीखीं। जीतू सेना में हैं और आज जो कुछ भी हैं उसका क्रेडिट भारतीय सेना को देते हैं।

सफलता नहीं, लेकिन फॉर्म बरकरार
साल 2014 के विश्व कप में जीतू दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय निशानेबाज बने थे, लेकिन इसी सफलता को वह साल 2015 और 2016 में दोहरा नहीं पाए। इसके बावजूद उन्होंने साल 2015 में चेंगवॉन विश्व कप में 10 मी. एयर पिस्टल वर्ग में ब्रॉन्ज और साल 2016 में बाकू आईएसएसएफ विश्व कप में सिल्वर हासिल किया। जीतू की चुनौती को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, क्योंकि उन्हें पदक भले ही नहीं मिले, लेकिन उन्होंने अपना दबदबा बनाए रखा है। यह वजह है कि जीतू विश्व रैंकिंग में टॉप थ्री में बने हुए हैं।

'मिशन ओलंपिक ' में गोल्ड को हासिल करने का लक्ष्य
जीतू की निगाहें सेना के 'मिशन ओलिंपिक गोल्ड' को हासिल करने पर टिक गई हैं और वे पूरी शिद्दत से इसकी तैयारी में जुटे गए हैं। विजय कुमार लंदन ओलंपिक में इसे हासिल करने से चूक गए थे और उन्हें रजत पदक पर संतोष करना पड़ा था। जीतू कहते हैं कि उनका ध्यान रैंकिंग पर नहीं, बल्कि मेडल जीतने पर है। वह बताते हैं कि ओलंपिक खेलना उनका सबसे बड़ा सपना है।

बड़ी कामयाबियां
2014 में विश्व कप में 50 मी. फ्री पिस्टल में सिल्वर जीता 2014 में विश्व कप में 10 मी. एयर पिस्टल में गोल्ड हासिल किया 2014 में एशियाई खेलों में 50 मी. फ्री पिस्टल में गोल्ड हासिल किया 2014 में एशियाई खेल में 10 मी. एयर पिस्टल में ब्रॉन्ज पर कब्जा किया 2014 में कॉमनवेल्थ गेम्स में 50 मी. फ्री पिस्टल में गोल्ड जीता 2014 में 50 मी. फ्री पिस्टल में सिल्वर 2015 में 10. मीटर एयर पिस्टल में ब्रॉन्ज जीतकर अपना दबदबा बनाए रखा 2016 विश्वकप में 10 मी. एयर पिस्टल में सिल्वर जीता।

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