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जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में LOC पर ड्यूटी के दौरान शहीद हुए अनूप थापा, PHOTOS


देहरादून : देश की आन, बान और शान की रक्षा करते हुए उत्तराखंड का एक और सपूत सरहद पर शहीद हो गया। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा पर ड्यूटी के दौरान गोरखा रेजीमेंट के हवलदार अनूप थापा की आतंकियों से मुठभेड़ हो गई। जवाबी फायरिंग से अनूप ने घुसपैठ को तो नाकाम कर दिया, लेकिन दुश्मनों की गोली उनका सीना छलनी कर गई। शनिवार शाम यह खबर डाट काली मंदिर स्थित शहीद अनूप थापा के घर पहुंची तो वहां कोहराम मच गया। देहरादून-दिल्ली हाईवे पर डाट काली मंदिर के पुजारी उमाशंकर के सबसे बड़े बेटे अनूप कुमार थापा (40) वर्ष 1994 में सेना में भर्ती हुए थे। 

स्वभाव से बेहद मिलनसार अनूप गोरखा रेजीमेंट में तैनात थे। एक माह पहले ही उन्हें जम्मू-कश्मीर नियंत्रण रेखा पर तैनात किया गया था। बीते शुक्रवार वहां कुछ आतंकी घुसपैठ की फिराक में थे। इस दौरान हुई मुठभेड़ में अनूप को गोली लग गई। शनिवार को अनूप की शहादत की खबर डाट काली मंदिर स्थित उनके घर पहुंची तो पिता उमाशंकर बदहवास हो गए और पत्नी नूतन बेसुध होकर गिर पड़ीं। परिजनों ने उन्हें किसी तरह संभाला। अनूप के 12 वर्षीय बेटे मोक्ष का रो-रोकर बुरा हाल है तो तीन साल का अक्ष इस सबसे अंजान कि उसके सिर से पिता का साया छिन चुका है। रविवार देर शाम अनूप थापा का शव हवाई मार्ग से देहरादून पहुंचा। आज चंद्रबनी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया ।

छिन गई बुढ़ापे की लाठी
डाट काली मंदिर में पुजारी उमाशंकर की छह संतानों में अनूप थापा सबसे बड़े थे। चार बेटियों रेखा, रूपा, संजना व ममता की शादी हो चुकी है। पत्नी ललिता की वर्ष 2006 में मौत हो जाने के बाद उमाशंकर अकेले पड़े तो अनूप ने उन्हें सहारा दिया। दो साल पहले छोटे बेटे रोहित की बीमारी के चलते मौत हो गई तो पूरे घर की जिम्मेदारी अनूप के कंधों पर आ गई। हाल के वर्षो में घर में हुई दो मौतों के बाद उमाशंकर के चेहरे से हंसी गायब हो गई थी, लेकिन वह आश्वस्त थे कि उनका बड़ा बेटा बुढ़ापे की लाठी बनेगा। लेकिन, होनी को तो कुछ और ही मंजूर था। अनूप की शहादत की खबर सुनने के बाद से ही वह गुमसुम हैं।

सितंबर में होने वाले थे सेवानिवृत्त
अनूप सितंबर में सेवानिवृत्त होने वाले थे। शनिवार को गोरखा रेजीमेंट में उनकी फेयरवेल पार्टी होने वाली थी। इसके बाद वह तीन अगस्त को घर आ जाते।

बच्चों को घुमाने को वादा रह गया अधूरा
सेवानिवृत्त होने से पूर्व अनूप को एक महीने के लिए बनारस में तैनात होना था। पेंशन अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए उन्हें सेना की तरफ से यह सुविधा मिल रही थी। अनूप ने फोन पर इसकी जानकारी घर वालों को दी। उन्होंने पत्नी और बच्चों से वादा किया था कि तीन अगस्त को आने के बाद वह सबको साथ लेकर बनारस चलेंगे।

वन मंत्री पहुंचे शहीद के घर 
वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने रविवार को हवलदार के घर पहुंच परिजनों को ढांढस बंधाया। वन मंत्री करीब आधे घंटे तक शहीद अनूप के घर पर रहे।

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी दी अंतिम विदाई 
राज्य के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी दिवंगत शहीद अनूप थापा के पार्थिव देह को अंतिम विदाई दी। इस अवसर पर गोरखा समाज समेत बड़ी संख्या में देहरादून के लोगों ने उत्तराखंड के वीर सपूत को नम आँखों से श्रद्धांजलि दी।










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