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गोर्खाली सुधार सभा, देहरादून की मनमानियों के खिलाफ समाज के लोगों का हड़ताल/ प्रदर्शन


वीर गोरखा न्यूज नेटवर्क 
देहरादून : गोर्खाली सुधार सभा की मनमानियों के खिलाफ गोरखा समाज ने एकजुट होकर गढ़ी कैंट स्थित कार्यालय में अपनी मांगों को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में सभा के आजीवन सदस्यों ने सभा में व्याप्त तानाशाही का विरोध करते हुए चुनाव समिति का गठन नियमानुसार करने एवं गोरखा समाज कल्याणकारी कार्यों में मिलने वाली वित्तीय मदद बंद करवाने की कोशिश करने वाले अनिल कुमार कक्कड़ को संरक्षक पद से हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल प्रारम्भ की। सभा के अध्यक्ष भगवान सिंह छेत्री से मिलकर समाज के लोगों ने संरक्षक बनाए गए कक्कड़ का पद तत्काल निरस्त करने और सभा के विधान 2010 को प्रभावी बनाने की मांग की। साथ ही समाज के लोगों द्वारा गोर्खाली सुधार सभा में महिला प्रकोष्ठ को संविधान के नियम विपरीत बताते हुए, इसको भी तुरंत निरस्त करने की मांग की। वहीं संरक्षक बनाएं गए अनिल कक्कड़ ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए इस तरह की मांग को गलत बताया। उन्होंने हटाने की बात पर इशारों इशारों में कहा कि सभी पदाधिकारी हटाने स्थिति में कोर्ट जाकर स्टे ले सकते है। उन्होंने संविधान संशोधन को जानकारी का अभाव कहकर इस पूरे घटनाक्रम पर आपत्ति जताई।

गोरखा सदस्यों की वोटिंग पावर छीन चुकी है सभा

गोर्खाली सुधार सभा की चुनाव समिति 26 जून 2016 वार्षिक आम सभा में गठित किया जाना था, मगर नहीं किया गया। समाज के लोगों ने इसे नियमानुसार लागू कराने की मांग की। पिछले 2015 के आम सभा में पारित हुए बिना सूचना विधान (बाय लॉ) में छेड़छाड़ की गई। सभा के आम सदस्यों को इस विधान के अनुसार वोट देने का अधिकार नहीं रह गया है। हड़ताल कर रहे सदस्यों ने वन मेन वन वोट प्रणाली लागू कर सभा के सदस्यों को उनका संवैधानिक अधिकार वापस लौटाने की मांग की।

19 फरवरी 2016 में विधान में किए संशोधन का विरोध 

गोर्खाली सुधार सभा में हड़ताल कर रहे सदस्यों ने 19 फरवरी 2016 में विधान में किए संशोधन का विरोध करते हुए 2010 के विधान को लागू करने की वकालत की। इसके अलावा अतिआवश्यक होने पर पुनः एक समिति का गठन कर उक्त विधान में संशोधन की बात कही। इस अवसर पर सभा के सदस्य भूपेंद्र छेत्री, कमला थापा, मंजु कार्की, सीमा शाही ,कमल कुमार राई ( अध्यक्ष, गोरखा समन्वय समिति), नलिन प्रधान (ग्राम प्रधान, अनारवाला), दुर्गेश पंडित (ग्राम प्रधान जौहरी गांव ), सरोज गुरुंग (पूर्व प्रधान, नया गांव ), संध्या थापा (पूर्व उप प्रधान, मोथरोवाला ),  दुर्गा राई (उप प्रधान, जयतनवाला वाला) गोदावरी थापली ( वरिष्ठ समाज सेवी ) मौजूद रही।

कक्कड़ बोले, उनको हटाने का अधिकार गोर्खाली सभा को भी नहीं

हाल में ही गोर्खाली सुधार सभा के संरक्षक बनाए गए अनिल कुमार कक्कड़ ने बताया कि संविधान संशोधन का अधिकार केवल शाखा अध्यक्ष एवं उनके सात सदस्यों को है। लेकिन कुछ लोगों के द्वारा कुछ लोगों के द्वारा ये कहा जाए कि संविधान में संशोधन हो, तो यह नामुमकिन बात है। उन्होंने आगे कहा कि संरक्षक को संविधान के अनुसार आजीवन पद पर बने रहने का अधिकार प्राप्त है। संविधान के अनुसार किसी भी जाति का व्यक्ति सभा का संरक्षक बन सकता है। संरक्षक को हटाने का अधिकार स्वयं गोर्खाली सुधार सभा को भी नहीं है। पहले भी भिन्न-भिन्न जातियों के कुल 161 संरक्षक है।  उन्होंने आग कहा कि अगर पदाधिकारियों का कार्यकाल पूरा होने से पहले कोई पद से हटाने की बात कहता है तो उन्हें कोर्ट से स्टे लेने का अधिकार प्राप्त है।


' अपने वरिष्ठ समाजसेवी भाइयों बहनों के बिना गोरखा समाज के यह कार्य सफल नही हो सकता था। हम अपने समाज के वरिष्ठ समाज सेवियों को ह्रदय से धन्यवाद करते है, जो अपने समाज के  हित के लिये आगे बढ़ कर आए। '
 - पूजा सुब्बा,  वरिष्ठ गोरखा समाजसेवी 















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