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नेपाल के पीएम केपी ओली ने अविश्वास प्रस्ताव का सामना किए बगैर दिया इस्तीफा


काठमांडू। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने आखिर इस्तीफा दे दिया है। संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देने से पहले ही उन्होंने पद छोड़ दिया। ओली ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति बिंदिया देवी भंडारी को सौंप दिया है। इससे पहले नेपाल के माओवादियों ने सरकार से पहले ही समर्थन वापस ले लिया था और ओली के इस्तीफा देने से इन्कार के बाद नेपाली कांग्रेस और सीपीएन (एम) की ओर से अविश्वास प्रस्ताव की मांग की गई थी। गौरतलब है कि नेपाल सालों से संकट से घिरा रहा है और ओली पर मंडराते खतरे से व्यापार मत भी जोखिम से घिरा होगा। राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी (आरपीपी) के एक सीनियर अधिकारी किरण गिरी ने बताया, 'प्रधानमंत्री और उनकी पार्टी के कारण हमारे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं। उनका इशारा पार्टी के उस निर्णय की ओर है जो ओली के गठबंधन को खत्म करने के लिए लिया गया।

' मधेशी जनाधिकार फोरम नेपाल (डेमोक्रेटिक) पार्टी ने भी गठबंधन छोड़ने की पुष्टि की है। दोनों पार्टियों ने कहा कि वे विपक्ष से जुड़ जाएंगे। हिंसात्मक प्रदर्शनों के बाद 1990 में बहुदलीय व्यवस्था का दौर आया था। अपना पहला रिपब्लिकन संविधान अपनाने के बाद से यानि सितंबर से ही नेपाल संकट से जूझ रहा है। देश के दक्षिण में रह रहे मधेशी अल्पसख्यकों ने यह कहते हुए इस संविधान को खारिज कर दिया। दो माह पहले जब ओली ने मधेशियों की समस्याओं पर ध्यान देते हुए कहा कि पिछले साल भूकंप में नष्ट हुए मधेशियों के घरों का वो पुर्ननिर्माण कराएंगे उसी वक्त माओवादियों ने ओली को बाहर करने का निर्णय ले लिया था। लेकिन ओली के आलोचकों ने कहा कि वे वादे के अनुसार काम नहीं करते। माओवादी प्रमुख प्रचंड ने संसद में कहा, ‘प्रधानमंत्री अहंकार केंद्रित और आत्म-केंद्रित हो गए हैं और किसी को सुनने से इन्कार करते हैं।‘ प्रचंड ने कहा, इन सबकी वजह से हम उनके साथ आगे काम को जारी रखने में असमर्थ हैं।


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