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गोर्खाली सुधार सभा, देहरादून ने गोर्खा विरोधी अनिल कक्कड़ को किया बर्खास्त


हिन्दुस्तान रिपोर्ट
देहरादून :
गोर्खाली सुधार सभा ने संरक्षक बनाए गए अनिल कक्कड़ को आखिर निष्कासित कर दिया है। सभा के इस कदम से असंतुष्टों में रोष कम हुआ है। अनिल कक्कड़ को 1 जुलाई को गोर्खाली सुधार सभा का संरक्षक बनाया गया था। लेकिन कक्कड़ पर गोर्खा विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए सभा के कई आजीवन सदस्यों ने अंदरखाने विरोध शुरू कर दिया था। 6 जुलाई को ये विरोध खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में सदस्यों ने सभा के गेट पर ही धरना शुरू कर दिया। उनका कहना था की कक्कड़ ने गोर्खा संगठनों के खिलाफ सूचनाएं लगाकर और कुछ संगठनों की सरकारी आर्थिक मदद बंद करने के पत्र सरकार को भेजे। दो दिन तक आंदोलन के बाद आपसी बातचीत से मामला सुलझाने की बात कही गई। विरोध करने वालों ने 13 जुलाई तक का अल्टीमेटम दिया था कि मांगें नहीं मानीं तो अनशन होगा। वे सबसे पहले कक्कड़ को हटाने की मांग कर रहे थे। जिस पर सभा के पदाधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया था। पहले अनिल कक्कड़ से स्वेच्छा से इस्तीफा देने को कहा गया। लेकिन नहीं देने पर उन्हें सभा अध्यक्ष ने निष्कासित कर दिया। इस मांग के पूरे होने पर असंतुष्ट सदस्यों में रोष कम हुआ है।

सभा के इतिहास में काला दिन : कक्कड़
सभा से निष्कासित संरक्षक अनिल कक्कड़ का कहना है कि यह सभा के इतिहास में काला दिन है। 1938 से अब तक किसी को संरक्षक पद से निष्कासित नहीं किया गया है। सभा के संविधान में ही इस प्रकार का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि वह पूरे घटनाक्रम को लेकर सभा पर 50 लाख की मानहानि का मुकदमा करेंगे। फैसले को कोर्ट में चुनौती देंगे। फीस के 10 हजार वापस नहीं किए हैं, इसके लिए धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया जाएगा। सभा की ओर से जो प्रमाणपत्र दिया उसे वह हमेशा दिल से लगाकर रखेंगे।

सभा हित में लिया फैसला
गोर्खाली सुधार सभा के अध्यक्ष रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल बीएस क्षेत्री  ने कहा कि अनिल कक्कड़ का सभा के सदस्यों ने विरोध किया था। उन्हें गोर्खा समाज विरोधी बताया जा रहा था। सभा और समाज के हित में उन्हें निष्कासित करने का फैसला लिया गया। अब किसी भी सदस्य में रोष नहीं है। आपसी बातचीत से सारे मसले सुलझा लिए जाएंगे।

फैसले का स्वागत
असंतुष्ट सदस्य केके राई ने कहा कि समाज और सभा के हित में सभा अध्यक्ष का कक्कड़ को हटाने का फैसला सराहनीय है। उनका आभार है। हम अपने व्यक्तिगत हितों की नहीं समाज की लड़ाई लड़ रहे हैं। गोर्खा समाज का विरोध करने वालों के हम हमेशा खिलाफ हैं। बाकी मांगों के लिए संघर्ष जारी है। 13 अगस्त की मीटिंग में अन्य मांगें मानने का आश्वासन मिला है।


गोर्खा समाज के हकों की लड़ाई
असंतुष्ट सदस्य कमला थापा ने कहा कि हम इस फैसले का स्वागत करते हैं। हम गोर्खा समाज के हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। बाकी मांगों पर भी जल्द कार्रवाई हो।

ये हैं प्रमुख मांगें
-  गोर्खाली सुधार सभा चुनाव समिति का तुरंत गठन किया जाए, जो 26 जून को हुई आम सभा में नहीं हो पाया था।
-  संविधान में संशोधन कर जो वन मैन वन वोट खत्म किया गया है, उसे वापस लें।
-  गोर्खा विरोधी लोगों को सभा का संरक्षक बनाया जाना गलत है। ऐसे लोगों को हटाया जाए।
- गोर्खाली सुधार सभा महिला प्रकोष्ठ संविधान में नहीं है, उसे निरस्त किया जाए।
- संविधान में वर्ष 2010 में हुए संशोधन को ही माना जाए, न कि वर्ष 2016 के संशोधन को।

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बर्खास्त किए जाने सम्बन्धी आधिकारिक पत्र

साभार - हिन्दुस्तान 

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