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देहरादून के 3 गोर्खा जेनरेशन की स्टोरी है मधु गुरुंग की पुस्तक 'कीपर ऑफ मेमोरीज'


देहरादून : राजधानी स्थित भारत रक्षा सेवा अधिकारी संस्थान ( DSOI) में रविवार को मशहूर गोरखा समाजसेवी अऊर लेखिका मधु गुरुंग की पुस्तक 'कीपर ऑफ मेमोरीज' का विमोचन हुआ। लेखिका मधु गुरुंग का कहना है कि कहा कि जीवन कहानियों से भरा पड़ा है, लेकिन कोई उन्हे सहेजता नहीं। ऐसे में यह शुरुआत उन्होंने की। इसमें उनकी मां, शिक्षकों व पति ने प्रेरक की भूमिका निभाई। पुस्तक में मुख्य सहयोगी की भूमिका निभाने वाली प्रीति गिल ने कहा कि मधु वाकई कीपर ऑफ मेमोरीज है। किताब दून में बसे गोर्खाओं पर आधारित है, जहां गोर्खा योद्धा के रूप में आए और यहीं बस गए। भारत में गोर्खा इतिहास की तीन पीढि़यों तक फैली यह कहानी तीन भाइयों के जीवन पर आधारित है। रायपुर में पले-बढ़े इन युवाओं ने खुद अपना भविष्य बनाया। ज्येष्ठ रन बहादुर गुरुंग ने अपने पूर्वजों के नक्शेकदम पर चलते हुए स्वतंत्रता से पूर्व सेना में जाने का फैसला लिया। वह विश्वयुद्ध के दौरान लड़ाई के लिए बर्मा चले जाते हैं। जहां स्मृति कम होने की वजह से उन्हें पीछे छोड़ दिया जाता है। उनके छोटे भाई बीर बहादुर या बीरू का कोलकता के फुटबॉल क्लबों में मादक ड्रेनालाइन भीड़ पीछा करती है। छोटा भाई खड़के अपने सपने को साकार करने के लिए फिल्मी दुनिया में पदार्पण करता है। 

पुस्तक का विमोचन इंडियन मिलिट्री एकडेमी के कमांडेट लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी, पुलिस महानिदेशक एमए गणपति, इतिहास शिक्षिका डी. बटलर व्हाइट, अंग्रेजी साहित्य शिक्षक शांति स्वरूप और लेखिका मधु की माता इंदिरा गुरुंग ने किया। गौरतलब है कि 1971 के युद्ध में वीर चक्र विजेता रहे कर्नल रण बहादुर गुरुंग की बेटी मधु के पति भारतीय सेना में सैन्य सचिव रहे लेफ्टिनेंट जनरल ( सेवानिवृत) शक्ति गुरुंग है। मधु ने म्यामार में रहते हुए 2013 में Burmese Folktales: Stories from Forgotten Kingdoms नामक लघुकथाओं पर अाधारित पुस्तक लिख चुकी है।


- मधु गुरुंग की अंग्रेजी मे लिखी लघुकथाएं पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।

- मधु गुरुंग द्वारा अंग्रेजी मे लिखी स्टोरी  पढ़ने के लिए लिंक पर क्लिक करें।








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