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सिक्किम के किसानों के लिए 'वरदान' साबित हो रहा गोमूत्र आधारित ऑर्गैनिक खेती


गंगटोक : निमश्रेंग लेपचा औषधीय पत्तों को गोमूत्र में डुबोते हैं और फिर अपने खेत में लगे टमाटर के पौधों पर उसे छिड़कते हैं। हिमालय के निचले भाग में खेती करने वाले लेपचा इसी तरह अपने खेतों को कीटाणुओं से बचाते हैं। यह तरीका इस इलाके से उत्तर पूर्वी राज्य सिक्किम तक अपनाया जाता है। सिक्किम भारत का पहला ऐसा राज्य है, जिसने पूरी तरह से ऑर्गेनिक खेती को अपना लिया है। एक दशक से भी ज्यादा समय से सिक्किम के 66 हजार किसानों ने पेस्टिसाइड, फर्टिलाइजर जैसे केमिकल पदार्थों का प्रयोग बंद कर दिया है। पारंपरिक कृषि के तरीकों को फिर से अपनाया है। 

नेपाल, चीन और भूटान से घिरा यह राज्य आधी सदी पहले भारत में शुरू की गई हरित क्रांति के काउंटर की प्रयोगशाला बन गया है। पेस्टिसाइड और फर्टिलाइजर के बढ़ते प्रयोग से स्वास्थ्य और पर्यावरण की समस्याओं के साथ-साथ बंजर जमीन, पानी की कमी जैसी मुश्किलें भी सामने हैं। ऑर्गैनिक खेती से प्रकृति को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी सिक्किम को पूरा समर्थन मिला हुआ है। पिछले महीने मेघालय में एक भाषण के दौरान मोदी ने कहा था, 'दूसरे राज्य सिक्किम से सीख सकते हैं। उत्तर पूर्व देश का ऑर्गैनिक फूड बास्केट बन सकता है। ऑर्गैनिक प्रॉडकट्स का प्रयोग काफी तेजी से बढ़ने वाला है। ऑर्गैनिक खेती लोगों और क्षेत्र की आय बढ़ाने का काम करेगी।'

बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऑर्गेनिक फसलों के 6,50,000 उत्पादक हैं। इस इंडस्ट्री में रिसाइक्लिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग के जरिए रोजगार में 30 पर्सेंट तक का इजाफा किया जा सकता है। नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात समेत देश के करीब एक दर्जन सूबे ऑर्गेनिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं।
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