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प्रथा के नाम पर पीरियड आने पर नेपाली लड़कियों से होता है अछूतों जैसा व्यवहार


काठमांडू : नेपाल के कुछ इलाकों में आज भी लड़कियों को पीरियड के दौरान बड़ी अजीबोगरीब कंडीशन से गुजरना पड़ता है। इसके पीछे वजह है यहां की छौपदी प्रथा। उन्हें कंघी-शीशे के इस्तेमाल से लेकर घर में रहने तक की मनाही होती है। नेपाल की लड़कियों ने इन पाबंदियों को फोटोज के जरिए दिखाने की कोशिश की है। क्या है वजह...

- छौपदी का मतलब है अनछुआ। ये प्रथा सदियों से नेपाल में जारी है।
- पीरियड या डिलिवरी के चलते लड़कियों को अपवित्र मान लिया जाता है। इसके बाद उन पर कई तरह की पाबंदिया लगा दी जाती हैं।
- वह घर में नहीं घुस सकतीं। पेरेंट्स को छू नहीं सकती। खाना नहीं बना सकती और न ही मंदिर और स्कूल जा सकती हैं।
- खाने में सिर्फ नमकीन ब्रेड या चावल दिए जाते हैं।
- अगस्त में आने वाले ऋषि पंचमी फेस्टिवल में महिलाएं नहाकर पवित्र होती हैं। साथ ही, अपने पापों की माफी भी मांगती हैं।
- छौपदी को नेपाल सुप्रीम कोर्ट ने 2005 में गैरकानूनी करार दिया था।


प्रथा को नहीं माना तो मिलेगी सजा
- हिंदू धर्म से जुड़ी इस प्रथा का पालन न करने पर सजा के बारे में भी बताया गया है।
- इस क्षेत्र में ऐसी धारणा है कि महिला द्वारा प्रथा को न मानने पर उसकी फैमिली में मौत हो सकती है।
- पीरियड में फसल हाथ लगाने पर बर्बाद हो जाती है। खुद से पानी लेने पर सूखा पड़ता है।
- फल काे हाथ लगाने पर वह कभी नहीं पकता।

कंघी-शीशे का इस्तेमाल भी मंजूर नहीं
सुषमा दियाली (15) कहती है कि ये मेरे घर में रखे कंघी और शीशे की फोटो है। हमारी सोसायटी में लड़कियों को पीरियड्स के दौरान इसके इस्तेमाल की इजाजत नहीं होती, जबकि इसका सीधा संबंध साफ-सफाई से है। मैं और मेरा परिवार ऐसी पाबंदियों को नहीं मानता।

नहाने के लिए भेज देते हैं तालाब
मनीषा कर्की (15) कहती है कि पीरियड्स के दिनों इसी जगह पर नहाता पड़ता है और यहीं अपने कपड़े धोने होते हैं। इस फोटो में इस्तेमाल किए गए पैड्स हैं। इन्हें धुलने से पहले मैंने ये फोटो क्लिक की। पीरियड्स के दौरान पब्लिक प्लेस पर ऐसे कपड़े धोना हमारे लिए बहुत ही शर्मिंदगी भरा होता है।

बटोरनी पड़ती है घास और लकड़ियां
रबीना बुधाथोकी (15) कहती है कि अपने पहले पीरियड्स के दौरान मुझे घास और लकड़ियां बटोरने के लिए भेजा गया था। मैंने उस वक्त की अपनी फोटोज कैमरे में कैद की। पहले पीरियड्स के दौरान मेरे लिए ये सब बहुत चौंकाने वाला था।

पीरियड्स में नहीं देख सकते सूरज
बंदाना खडका (15) कहती है कि उगते सूरज की ये तस्वीर मैनें अपने घर से ली है। सुबह-सुबह ये नजारा ताजगी भर देता है। पर जब मुझे पहली बार पीरियड्स हुए, तो मुझे सूरज को देखने की भी मनाही हो गई। हालांकि, इन सबके बावजूद मैं सूरज को देखती हूं और मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई।

फैमिली से दूर रहने की मजबूरी
बंदाना खडका (15) बताती है कि फोटो में दिख रही ये मेरी मां और बहन हैं। मेरी मां बहन को बहुत प्यार से खाना खिला रही है। पर मुझे अपने पीरियड्स के दौरान घर से अलग रखा जाता है और वहीं अकेले खाना दिया जाता है। मुझे किसी का प्यार नहीं मिलता, जबकि इस वक्त पर ज्यादा प्यार और दुलार की जरूरत होती है। हमसे अछूत जैसे बर्ताव होता है, जो बहुत बुरा लगता है।

घर में रहने और नहाने की पाबंदी
बिशेष्ता भंडारी (15) बताती है कि ये वो जगह है जहां पहली बार मुझे पीरियड्स में नहाने के लिए भेजा गया। इस फोटो में मेरी बहन सृष्टि अपना मुंह धो रही है। इस दौरान मुझे दूसरे घर में रखा गया, जो मेरे घर से 15 मिनट की दूरी पर है। इस वक्त जब हमें ज्यादा प्यार, केयर और सेफ्टी की जरूरत होती है, तब हमें अपनों से भी दूर कर दिया जाता है।

नहीं खा सकते पपीता
सबीना गौतम (15) बताती है कि इस फोटो में मेरी मां पपीता काट रही हैं। हमारी कम्युनिटी में ऐसा मानना है कि पीरियड्स के दौरान पपीता नहीं खाना चाहिए। मुझे पपीता बहुत पसंद है, लेकिन मैं इसे खा नहीं सकती। यहां तक कि पपीते के पेड़ को भी छूना मना होता है।






- दैनिक भास्कर से साभार

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