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पाकिस्तान के न्यूक्लियर प्रोग्राम से बढ़ा भारत से जंग का खतरा : अमेरिकी रिपोर्ट


वॉशिंगटन : पाकिस्तान की ओर से परमाणु हथियारों के प्रति सक्रियता बढ़ाए जाने से भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु जंग का खतरा बढ़ गया है। पाकिस्तान की ओर से एनएसजी में शामिल किए जाने के प्रयासों को तेज करने के बीच अमेरिकी कांग्रेस से संबंधित एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप में भारत की एंट्री को अमेरिका और मेक्सिको समेत कई देशों के समर्थन के बाद पाकिस्तान ने भी इसके लिए अपनी दौड़ तेज कर दी है। अमेरिकी कांग्रेस की रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की ओर से हाल ही में पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक, 'इस्लामाबाद की ओर से परमाणु आयुधशाला के विस्तार, नए तरह के हथियारों के निर्माण और परमाणु कार्यक्रम को तेज करने से ऑब्जर्वर्स की इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु जंग का रिस्क बढ़ गया है।' नॉन-प्रॉलिफिरेशन के एनालिस्ट पॉल के केर और स्पेशलिस्ट मैरी बेथ की ओर से 'पाकिस्तान के परमाणु हथियार' नाम से तैयार की गई रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि पाकिस्तान के पास 110 से 130 की संख्या में परमाणु हथियार मौजूद हैं। यह संख्या ज्यादा भी हो सकती है।

पीटीआई के पास मौजूद 14 जून को सौंपी गई रिपोर्ट की कॉपी के मुताबिक पाकिस्तान अपने परमाणु हथियार भंडार को लगातार बढ़ा रहा है ताकि भारत उसके खिलाफ सैन्य कार्रवाई न कर सके। सीआरएस अमेरिकी कांग्रेस का एक स्वतंत्र रिसर्च विंग है, जो समय-समय पर अमेरिकी सांसदों से संबंधित विषयों पर अपनी रिपोर्ट्स पेश करता है। इस ग्रुप की राय को आधिकारिक तौर पर यूएस कांग्रेस की बात नहीं माना जाता है। 30 पेजों की यह रिपोर्ट ऐसे वक्त पेश की गई है, जब पाकिस्तान 48 देशों की सदस्यता वाले एनएसजी की दौड़ के लिए अमेरिकी समर्थन हासिल करने की कोशिशों में जुटा है। हालांकि रिपोर्ट में माना गया है कि पाकिस्तान ने अपनी परमाणु हथियारशाला की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भरोसा कायम करने का प्रयास किया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इन उपायों पर पाकिस्तान का बने रहना और आगे बढ़ना अब भी सवालों के घेरे में है।

हाइलाइट्स

► रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पास 110 से 130 परमाणु हथियार मौजूद
► एनएसजी में शामिल होने की दौड़ में है पाकिस्तान
► परमाणु हथियारों की सुरक्षा के पाकिस्तान के उपाय अब भी सवालों के घेरे में


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