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मिग 21 को रिटायर करने एयरफोर्स में तेजस शामिल, जानें फाइटर प्लेन के कम्प्लीट बातें


नई दिल्ली :  भारतीय वायुसेना में दो तेजस विमानों को शामिल कर लिया गया है। विधिवत पूजा पाठ करके इन दो विमानों को शामिल किया गया। पूजा में पंडित के साथ अफसर भी बैठे और उन्होंने नारियल भी फोड़ा। वायुसेना देश में ही विकसित इस हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) के पहले स्क्वाड्रन का गठन करेगी। सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) पहले दो तेजस विमान भारतीय वायुसेना को सौंप रही है।  इससे इस एलसीए का पहला स्क्वाड्रन ‘फ्लाइंग डैगर्स’ 45 , गठित होगा।

अधिकारियों ने बताया कि दक्षिणी वायु कमान के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन चीफ एयर मार्शल जसबीर वालिया की मौजूदगी में यहां एयरक्राफ्ट सिस्टम टेस्टिंग एस्टेबलिशमेंट (एएसटीई) में एलसीए स्क्वाड्रन को शामिल गया। पहले दो साल यह स्क्वाड्रन बेंगलुरु में रहेगा। इसके बाद यह तमिलनाडु के सुलूर चला जाएगा। बीते 17 मई को तेजस में अपनी पहली उड़ान भरने वाले एयर चीफ मार्शल अरूप राहा ने विमान को बल में शामिल करने के लिए ‘अच्छा’ बताया था। वायुसेना ने कहा है कि इस वित्तीय वर्ष में कुल छह विमान और अगले वित्तीय वर्ष में करीब आठ विमान शामिल करने की योजना है। तेजस अगले साल वायुसेना की लड़ाकू योजना में नजर आएगा और इसे अग्रिम अड्डों पर भी तैनात किया जाएगा। तेजस के सभी स्क्वाड्रन में कुल 20 विमान शामिल किए जाएंगे जिसमें चार आरक्षित रहेंगे।

अगले साल तक रहेगा वायुसेना में

भारतीय वायु सेना ने तेजस विमान को अगले साल तक लड़ाकू भूमिका में तैयार करने की योजना बनाई है। इससे पहले जुलाई में स्वदेश निर्मित इन हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) का पहला दस्ता तैयार किया जाएगा। भारत इन विमानों को पाकिस्तान के जेएफ 17 लड़ाकू विमानों से उत्कृष्ट मानता है। सरकारी स्वामित्व वाली एचएएल पहले दो तेजस विमानों को एक जुलाई को वायु सेना को सौंपेगी जो एलसीए का पहला दस्ता ‘फ्लाइंग डैगर्स 45’ होगा।

कहां रहेगा तैनात

यह दस्ता पहले दो साल के लिए बेंगलूर में तैनात रहेगा और उसके बाद तमिलनाडु के सुलुर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। वायु सेना के सूत्रों ने कहा कि इस साल कुल छह विमान तैयार करने का और अगले साल करीब आठ और विमान तैयार करने का विचार है। तेजस अगले साल वायु सेना की योजना के तहत लड़ाकू भूमिका में दिखेगा और इसे अग्रिम ठिकानों पर भी तैनात किया जाएगा। सूत्रों ने कहा कि तेजस दुनिया में एकल इंजन वाला असाधारण विमान है।

जेएफ-17 से है बेहतर

जब पूछा गया कि पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित और निर्मित जेएफ-17 विमान की तुलना में तेजस कैसे आगे है तो वायु सेना ने कहा कि यह बेहतर है। एक सूत्र ने कहा कि यह बेहतर है क्योंकि इसका अधिकांश निर्माण ऐसे मिश्रण से हुआ है जो इसे हल्का और बहुत दक्ष बनाता है। इसके तीक्ष्ण गोला-बारूद और बम इसे सटीक तरीके से निशाना साधने में सक्षम बनाते हैं। सूत्रों ने कहा कि तेजस विमान मिग-21 विमानों की जगह लेगा और इसे हवा से हवा में प्रहार और जमीनी हमले के लिए इस्तेमाल में लाया जाएगा और यह सुखोई 30 एमकेआई जैसे बड़े लड़ाकू विमानों के लिए भी सहायक हो सकता है।

योजना के अनुसार 20 विमान जहां ‘प्रारंभिक परिचालन मंजूरी’ के तहत शामिल किये जाएंगे, वहीं 20 विमानों को बाद में ‘दृश्य सीमा से परे मिसाइल’ (बीवीआर) और कुछ अन्य विशेषताओं के साथ शामिल किया जाएगा। वायु सेना की बेहतर विशेषताओं के साथ करीब 80 विमानों को शामिल करने की योजना है, जिन्हें तेजस 1ए के नाम से जाना जाएगा। तेजस का यह उन्नत संस्करण 275 करोड़ से 300 करोड़ रपये के बीच की लागत का होगा। देश में ही लड़ाकू विमान बनाने की अवधारणा 1970 के दशक में रखी गयी थी, वहीं इस पर वास्तविक काम 80 के दशक में ही शुरू हो पाया और पहली उड़ान जनवरी 2001 में भरी गयी। इस बीच सूत्रों ने कहा कि एलसीए को लेकर भारत की पहली महिला लड़ाकू पायलट उड़ान नहीं भरेंगी और शुरू में अनुभवी पायलट ही इन्हें उड़ाएंगे। सूत्रों ने माना कि विमानों में बीच हवा में ईंधन डालने की क्षमता तेजस 1ए संस्करण में ही शामिल की जा सकेगी, जिसके 2019 में विकसित होने की उम्मीद है।

सीमित श्रृंखला का उत्पादन 2007 में शुरू

तेजस की सीमित श्रृंखला का उत्पादन 2007 में शुरू हुआ। दो सीटों वाला एक ट्रेनर संस्करण विकसित किया जा रहा है (नवम्बर 2008 तक उत्पादन के क्रम में था।), क्योंकि इसका नौसेना संस्करण भारतीय नौसेना के विमान वाहक पोतों से उड़ान भरने में सक्षम है। बताया जाता है कि भारतीय वायु सेना को एकल सीट वाले 200 और दो सीटों वाले 20 रूपांतरण प्रशिक्षक विमानों की जरूरत है, जबकि भारतीय नौसेना अपने सी हैरियर की जगह एकल सीटों वाले 40 विमानों का आदेश दे सकती है। तेजस के नौसेना संस्करण के विमानों के 2009 तक आसमान में उड़ान भरने की उम्मीद थी। हाल के घटनाक्रम से ऐसा लग रहा है कि विमान 2010 के अंत तक या 2011 के शुरू में भारतीय वायु सेना में शामिल हो जायेगा।. दिसम्बर 2009 में गोवा समुद्र स्तरीय उड़ान परीक्षण के दौरान, तेजस ने 1,350 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की गति से उडा़न भरी, इस प्रकार वह हिन्दुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड द्वारा स्वदेश में निर्मित पहला सुपरसॉनिक लड़ाकू विमान है।

विकास का इतिहास

एलसीए संरचना को 1990 में अंतिम रूप दिया गया और "रिलैक्स स्टेटिक स्टेबिलिटी" (RSS) के साथ यह एक छोटे डेल्टा पंख वाली मशीन के रूप में था, जिससे कि युद्ध कौशल में भूमिका बढ़ाई जा सके. लगभग तुरंत बाद ही उड्डयन के इलेक्ट्रानिक उपकरणों और उन्नत समग्र ढांचे जैसे कुछ निर्दिष्ट कारणों से थोड़ी चिंता हुई और भारतीय वायु सेना को संदेह हुआ कि एक ऐसी महत्वाकांक्षी परियोजना के समर्थन के लिए भारत के पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा है भी या नहीं. मई 1989 में एक सरकारी समीक्षा समिति का गठन किया गया, जिसने एक आम राय यह दी कि भारत के पास परियोजना शुरू करने के लिए बुनियादी ढांचे, सुविधाओं और प्रौद्योगिकी के अधिकतर क्षेत्रों में अधिक पर्याप्तता है। हालांकि, दूरदर्शिता के एक कदम के रूप में यह निर्णय लिया गया कि कार्यक्रम के पूर्ण पैमाने पर इंजीनियरिंग के विकास (FSED) के स्तर को दो चरणों में आगे बढ़ना होगा.

चरण-एक "अवधारणा के सबूत" पर ध्यान केंद्रित करेगा और इसमें दो प्रौद्योगिकी प्रदर्शक विमानों (TD-1 और TD-2) की संरचना, विकास और परीक्षण (DDT) और एक संरचनात्मक नमूना परीक्षण (STS) एयरफ्रेम का गठन शामिल होंगे और TD विमान के सफल परीक्षण के बाद ही भारत सरकार एलसीए संरचना को अपना पूरा समर्थन देगी. इसके बाद दो प्रोटोटाइप वाहनों (PV-1 और PV-2) का निर्माण और विमान के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे और परीक्षण सुविधाओं का निर्माण शुरू होगा. दूसरे चरण में तीन और प्रोटोटाइप वाहनों (PV-3 उत्पादन संस्करण के रूप में, PV-4 नौसेना संस्करण के रूप में और PV-5 ट्रेनर उपादानों के रूप में) का निर्माण, एक कठिन परीक्षण नमूना और विभिन्न केंद्रों पर विकास व परीक्षण की सुविधाएं बहाल करना शामिल होगा. चरण-1 1990 में शुरू किया और हिएलि ने 1991 के मध्य में प्रौद्योगिकी प्रदर्शनों पर काम शुरू कर दिया, हालांकि, वित्तीय संकट के कारण अप्रैल 1993 तक पूर्ण पैमाने पर धन अधिकृत नहीं किया गया, जिसके परिणामस्वरूप FSED के चरण-1 का काम 1 जून से शुरू हुआ। पहला प्रौद्योगिकी प्रदर्शक, TD-1, 17 नवम्बर 1995 को पूरा हुआ और उसके बाद 17 नवम्बर 1998 में TD-2 पूरा हुआ, लेकिन कई संरचनात्मक चिन्ताओं और उड़ान नियंत्रण प्रणाली के विकास में परेशानी के कारण इन्हें कई साल तक जमीन पर ही रखा गया।

31.09 करोड़ अमेरिकी डॉलर आएगी प्रति विमान की लागत

दिसम्बर 1996 में, तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार एपीजे अब्दुल कलाम ने गणना कर इसकी इकाई लागत 21 लाख अमेरिकी डॉलर बताई। 2001 के अंत में ऍडा और एलसीए कार्यक्रमों के निदेशक डॉ कोटा हरिनारायण ने एलसीए की इकाई लागत (220 विमानों के संभावित आदेश के लिए) 17 से 20 लाख अमेरिकी डॉलर आंकी और बताया कि एक बार उत्पादन शुरू हो गया तो इसकी कीमत 15 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है। हालांकि, 2001 तक दूसरों का संकेत था कि एलसीए की लागत (प्रति विमान 100 करोड़ रूपये से ज्यादा) 24 मिलियन अमेरिकी डालर आयेगा। (यह एक अमेरिकी डालर बराबर 41 भारतीय रुपए की दर से था, जबकि वर्तमान दर लगभग 62 रुपये है।) 

वर्तमान दरों पर इसकी प्रति विमान कीमत अभी भी 21.27 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। लागत में वृद्धि को देखते हुए कुछ विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि जब विमान बाहर आता है, तो इसकी प्रति विमान कीमत 35 करोड़ अमेरिकी डॉलर हो सकती है। 20 तेजस् विमानों के लिए 2,000 करोड़ रुपये (450 करोड़ अमेरिकी डॉलर) के आदेश से एक यूनिट की खरीद कीमत प्रत्येक के लिए 22.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर होगी, जो अब्दुल कलाम के अनुमानों के अनुरूप होगी. करीब 20 से 30 मिलियन अमेरिकी डॉलर की कीमत दर (100 से 150 करोड़) के कारण तेजस् दूसरे 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमानों से सस्ता होगा। टाइम्स ऑफ इंडिया के 3 फ़रवरी 2010 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत सरकार एलसीए परियोजना को जीवित रखने के लिए और 8000 करोड़ रुपए देगी। भारतीय नौसेना ने छह नौसैनिक एलसीए के लिए आदेश की हरी झंडी दिखा दी है। जिस पर प्रति विमान अनुमानित लागत 31.09 करोड़ अमेरिकी डॉलर (150 करोड़) आयेगी.

General Characteristics

    चालकदल : 1
    लंबाई : 13.20 मी (43 फ़ीट 4 इंच)
    Wingspan : 8.20 m (26 ft 11 in)
    ऊंचाई : 4.40 m (14 ft 9 in)
    पंख क्षेत्र : 38.4 m² (413 ft²)
    खाली वजन : 5680 किलो (14330 lb)
    भरा हुआ वजन : 9500 किलो (20,945 एलबी)
    अधिकतम उड़ान वजन : 13,500 किलो (31,967 एलबी)
    आंतरिक ईधन क्षमता : 3000 लीटर
    बाहरी ईधन क्षमता : 5×800 लीटर टैंक या 3x1200 लीटर टैंक, कुल 4000/3600 लीटर

Performance

    अधिकतम गति : मैक 1.8 (2,376+ km/h उंचाई पर) 15,000 मी० पर
    रेंज : 3000 km (1,840 एमाई (बिना ईधन भरे))
    अधिकतम सेवा सीमा : 16500 m (54000 फ़ीट (engine re-igniter safely capable))
    Wing Loading : 221.4 kg/m² (45.35 lb/ft²)
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