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उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन का फैसला रद्द करने वाले हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस केएम जोसेफ का ट्रांसफर



देहरादून/नई दिल्ली : उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को पलटने वाले नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ का तबादला कर दिया गया है। जोसेफ का ट्रांसफर चर्चा को विषय बना हुआ है।गौरतलब है कि 21 मार्च को चीफ जस्टिस केएम जोसेफ की खंडपीठ ने उत्तराखंड में लगे राष्ट्रपति फैसले को हटाने का आदेश दिया था। 99 पृष्ठों का यह फैसला आपने आप में एक नजीर माना जा रहा है। गौरतलब है कि जस्टिस जोसेफ ने उत्तराखंड में केंद्र के राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को खारिज कर हरीश रावत को फिर से मुख्यमंत्री बनने का रास्ता सुनिश्चित कर दिया था। जस्टि‍स जोसेफ और जस्ट‍िस वीके बिष्ट की बेंच ने अपने फैसले में कहा था, 'केंद्र की ओर से राज्य में धारा 356 का इस्तेमाल सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्धारित नियम के खिलाफ है।'अपने फैसले में जस्ट‍िस जोसेफ ने केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी. जोसेफ ने साफ कहा था कि राष्ट्रपति कोई राजा नहीं है. राष्ट्रपति ही नहीं जज भी गलती कर सकते हैं और इनके फैसलों को अदालत में चुनौती दी जा सकती है।

जोसेफ ने जुलाई 2014 में उत्तराखंड में बतौर मुख्य न्यायधीश पद संभाला था। गौरतलब है कि जस्टिस जोसेफ ने उत्तराखंड में केंद्र के राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को खारिज कर हरीश रावत को फिर से मुख्यमंत्री बनने का रास्ता सुनिश्चित कर दिया था।केंद्र सरकार नैनीताल हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची है। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सर्वोच्च अदालत को बताया कि केंद्र सरकार राज्य विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने के अदालत के फैसले पर गंभीरता से विचार कर रही है। जस्टिस केएम जोसेफ के पिता केके मैथ्यू भी सुप्रीम कोर्ट के जज रहे हैं। उत्तराखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त होने के पहले केएम जोसेफ 9 वर्ष तक केरल हाईकोर्ट में जज रहे हैं।
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