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पंजाब में सक्रिय गिरोह ब्रिटेन भेज जा रहा है गरीब भारतीय-नेपाली बच्चे

नई दिल्ली/काठमांडू : थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन नेपाल और भारत ने  उस रिपोर्ट पर चिंता जताई है जिसमें कहा गया है कि दोनों देशों से 10 साल की उम्र के बच्चों को ब्रिटेन के अमीर परिवारों में घरेलू काम के लिए पांच-पांच लाख रुपए में बेचा जा रहा है। ब्रिटिश अखबार  ‘द सन’ की तहकीकात से पता चला है कि पंजाब में सक्रिय गिरोह बेसहारा भारतीय बच्चों को निशाना बनाते हैं। इनके अलावा वे उन नेपाली बच्चों को भी अपना शिकार बनाते हैं, जो पिछले साल नेपाल में आए भूकंप के बाद से भारत आ गए हैं। सोमवार को प्रकाशित लेख के बाद ब्रिटेन की गृह सचिव थेरेसा मे ने पुलिस से ‘वास्तव में घृणित अपराध’- बाल तस्करी के आरोपों की जांच करने और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। नेपाल और भारत में सरकारी अधिकारियों ने कहा कि वे जानते हैं कि खास कर प्राकृतिक आपदाओं के बाद मानव तस्करी आम बात है, लेकिन वे हैरान हैं कि पीड़ितों को इतनी दूर ब्रिटेन भेजा जा रहा है। नेपाल में गृह मंत्रालय के प्रवक्ता यादव कोइराला ने थॉमसन रॉयटर्स फाउंडेशन को बताया, हमने पहले से ही पुलिस को इसकी जांच करने के निर्देश दिए हैं। यह बहुत गंभीर है।

उन्होंक ने कहा, अभी हमारे पास कोई सबूत नहीं है। जांच के दौरान अगर कोई सबूत मिला तो हम पीड़ितों को न्याय दिलाएंगे। सजा दिलाए बिना अपराधियों को छोड़ने का सवाल ही नहीं उठता है। भारत के गृह मंत्रालय में एक अधिकारी ने कहा कि सरकार, पूरी गंभीरता से मानव तस्करी के ‘खतरे’ से निपटने की कोशिश कर रही है। अधिकारी ने नाम नहीं बताने की शर्त पर कहा, यह सब जानते हैं कि नेपाल सीमा से सटे बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से गरीब परिवारों के बच्चों की तस्करी की जाती है। नेपाल में आए पिछले विनाशकारी भूकंप से यह समस्या बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी की समस्या से जूझ रहे पंजाब में मानव तस्करी की संभावना बढ़ जाती है, क्योंकि वही गिरोह बच्चों को खरीदने और बेचने का काम भी कर सकता है।

‘द सन’ की तहकीकात में एक खोजी पत्रकार धनी ब्रिटिश भारतीय के रूप में जालंधर आया और अपने साथ ब्रिटेन ले जाने के लिए एक बाल मजदूर की तलाश करने लगा। उसने एक व्यापारी माखन सिंह का उदाहरण दिया, जो संवाददाता के सामने तीन बच्चे लेकर आया और उनमें से एक को चुनने के लिए कहा। माखन सिंह ने दावा किया कि उसने इंग्लैंड के अमीर परिवारों को ज्यादातर नेपाली लड़के दिए हैं। उन्होंने बताया कि माखन सिंह ने कहा, नेपाली को इंग्लैंड ले जाओ। वे अच्छे लोग होते हैं। वे सभी घरेलू काम अच्छे से करते हैं और वे बहुत अच्छा खाना पकाते हैं। कोई भी आप के पीछे नहीं आएगा। उसने कहा, भारत में ढेरों लड़के हैं। नेपाल तबाह हो गया है और सभी नेपाली यहां हैं। हम गरीब माता पिता के पास जाते हैं, उनसे बात कर सौदा करते हैं।

संयुक्त राष्ट्र नशीली दवा और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) के अनुसार विश्व में पूर्व एशिया के बाद, दक्षिण एशिया  मानव तस्करी बसे तेजी से बढ़ रही है और यह मानव तस्करी का दूसरा बड़ा क्षेत्र है। ऑस्ट्रेलिया के वॉक फ्री फाउंडेशन द्वारा संपादित वैश्विक गुलामी सूचकांक 2015 के अनुसार विश्व के 3 करोड़ 60 लाख गुलामों में से लगभग आधे भारत में हैं। गिरोह हर साल अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों के हजारों गरीब बच्चों को शहर ले जाते हैं। वहां उन्हें बंधुआ मजदूरी करने के लिए बेचा या बेईमान मालिकों के यहां नौकरी पर रखा जाता है।ज्यादातर वे घरेलू नौकर या ईंट भट्टों में मजदूर के तौर पर अथवा सड़क किनारे के रेस्तरां या वस्त्र बनाने और कपड़ों पर कढ़ाई करने वाली छोटी इकाइयों में काम करने लगते हैं। कई महिलाओं और लड़कियों को वेश्यालयों में बेचा जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि आपदाओं के बाद घर, रोजगार और आजीविका समाप्त हो जाने से शोषण का खतरा और बढ़ जाता है।

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