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भारत के लिए कितना खतरनाक है नेपाल और चीन का दोस्त बनना ?

काठमांडू : नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चीन से एक हफ्ते की लंबी यात्रा के बाद वापस आ गए हैं। इनकी यात्रा के ठीक बाद नेपाली आर्मी चीफ जनरल राजेंद्र छेत्री भी एक हफ्ते के लिए चीन के दौरे पर पहुंचे। नेपाली आर्मी चीफ की यात्रा के बारे में कहा जा रहा है कि यह पाकिस्तान के पैटर्न का दौरा है। कोई पाकिस्तानी पीएम चीन जाता है तो उसके लौटने के ठीक बाद वहां का आर्मी चीफ भी वहां पहुंचता है। इससे पहले ओली 19 से 24 फरवरी तक इंडिया के दौरे पर थे। नेपाल द्वारा नया संविधान अपनाने के बाद भारत के साथ उसके रिश्ते में दरार आई है। नेपाल ने नया संविधान सितंबर 2015 में अपनाया था। इंडिया अपने पारंपरिक दोस्त और हिन्दू वर्चस्व वाले देश नेपाल से खराब होते रिश्तों को लेकर काफी संवेदनशील है। भारत को साफ महसूस हो रहा है कि नेपाल उसके हितों के खिलाफ काम कर रहा है। भारतीय मूल के मधेसियों को लग रहा है कि उन्हें नेपाल के नए संविधान में अलग-थलग कर दिया गया है। इनका कहना है कि नेपाल में वह हाशिए पर खड़े हैं और नए संविधान में भी उनकी उपेक्षा की गई है। तराई लोग विरोध कर रहे हैं कि नए राज्यों की रूपरेखा जैसी तैयार की गई है उससे उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।


इसी का नतीजा हुआ कि अनाधिकारिक रूप से भारत की सीमा पर नाकेबंदी रही। इससे पहले 1989-90 में भारत ने 15 महीने की नाकेबंदी की थी। भारत ने यह कदम नेपाल द्वारा चीनी हथियार खरीदने के कारण उठाया था। 31 मार्च 2016 को इंडिया और यूरोपीय यूनियन ने ब्रसल्ज समिट में जारी किए एक जॉइंट स्टेटमेंट में कहा था कि नेपाल को नए संविधान में सभी की आकांक्षा शामिल करनी चाहिए। इस बयान पर नेपाल ने भारी गुस्सा जताया था। चीन अब नेपाल की तरफ गंभीरता से देख रहा है और इससे भारत की चिंता बढ़नी लाजिमी है। नेपाल भयानक गरीबी से जूझ रहा है। माओवादियों ने 2008 में नेपाल से राजशाही खत्म कर दी थी। माओवादियों का नेपाल की राष्ट्रीय राजनीति में अब अहम प्रभाव है। ऐतिहासिक रूप से चीन और नेपाल के संबंधों पर तिब्बत पर नियंत्रण का असर रहा है। चीन जब एक बड़ी ताकत के रूप में उभरा तो सारी चीजें काफी तेजी से बदलीं। दोनों देशों ने 1960 में सीमा विवाद समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके साथ ही नेपाल और चीन के बीच अलग से शांति समझौता भी हुआ।

1961 में दोनों देशों को बीच ल्हासा और काठमांडू को सड़क से जोड़ने पर सहमति बनी। 1962 में चीन और भारत के बीच संघर्ष हुआ तो नेपाल बिल्कुल तटस्थ रहा। जब नेपाल की राजशाही माओवादी विद्रोह से संघर्ष कर रही थी तब अमेरिका और इंडिया ने वहां के राजा को हथियारों की सप्लाई से इनकार कर दिया था। हालांकि चीन ने हथियारों की सप्लाई की थी। उसने ऐसा तब किया जब चीन की ही विचारधारा माओवाद से प्रभावित होकर वहां के लोग राजशाही के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे। 2008 में हुए चुनाव के बाद वहां की माओवादी सरकार चाहती थी कि इंडिया के साथ 1950 के समझौते को रद्द कर दिया जाए। हालांकि अंततः यह हो नहीं पाया। इसके बाद चीन ने ल्हासा से खासा नेपाल की सीमा तक 770 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन को बनाना शुरू कर दिया।

नेपाली पीएम ओली की चीन यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच कई रणनीतिक समझौते हुए। नेपाल और चीन के बीच रेलवे लाइन डिवेलप करने पर भी दोनों देशों में समझौता हुआ। नेपाल पोखरा में इंटरनैशल एयरपोर्ट का भी निर्माण करेगा। दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड अग्रीमेंट होने की संभावना है। चीन ने नेपाल से कहा है कि वह चीनी बैंकों की शाखा नेपाल में खोलना चाहता है। आर्मी चीफ के चीन जाने का उद्देश्य दोनों देशों के बीच मिलिटरी सहयोग बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है। चीन नेपाली सैनिकों को ट्रेनिंग भी देगा। जुलाई 2013 से चीन नेपाल में 821 मिलियन रुपये का मिलिटरी उपकरण भेज चुका है। इसमें दो मोबाइल हॉस्पिटल भी शामिल हैं। चीन नेपाल में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है।

चीन के मुकाबले नेपाल से करीबी रखने में भारत को धार्मिक समानता, भाषा और ऐतिहासिक संबंधों से मदद मिलती है। 1950 में नेपाल और भारत के बीच पीस ऐंड फ्रेंडशिप समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के आवाजाही कर सकते हैं। यदि नेपाल और चीन के बीच कोई ट्रेड लिंक बनता है तो इसका मतलब यह हुआ कि वह विशाल हिमालय को पार करेगा। फिर वह बंगाल के जरिए समुद्र तक अपनी पहुंच आसानी से बना लेगा। इंडियन आर्मी में सात गोरखा रेजिमेंट्स हैं। चीन द्वारा तिब्बत को हड़पने के बाद नेपाल एक बफर स्टेट की भूमिका में आ गया है। इंडिया भी चाहता है कि नेपाल में उसकी मजबूत मौजूदगी बनी रहे ताकि इस्लामिक टेरर ग्रुप का घुसपैठ नहीं बढ़े।
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