Header Ads

सिंहस्थ महाकुंभ में शामिल होने आई दार्जलिंग की स्टाइलिश किन्नर संत शैली राई

 

उज्जैन। पिछले दिनों सिंहस्थ महाकुंभ में शामिल होने शहर आई दार्जलिंग की खूबसूरत और स्टाइलिश किन्नर संत शैली राई को इस बात का कोई मलाल नहीं कि उन्हें किन्नर अखाड़े से बेदखल किया गया। उन्होंने मीडिया के सामने रोते-रोते खुलासा किया कि अब उन्हें किन्नर अखाड़े से कोई लेना-देना नहीं। वे अब धर्म और समाज सेविका बनकर संतों की सेवा करेंगी। हर अखाड़े को अपना मानेगी। शैली राई परशुराम वेद विद्या प्रतिष्ठान के विशेष आमंत्रण पर रामघाट पर क्षिप्रा आरती करने पहुंची थीं। यहां के बटुकों के साथ किन्नर शैली ने क्षिप्रा जी की महाआरती की। 

इस बीच मीडिया ने जब शैली से पूछा कि किन्नर अखाड़े से क्यों निकाला गया, तो वे कहने लगी कि कुछ खास वजह नहीं है, बस पिता रूठ गए...और आंखों से अश्रुधारा फूट पड़ी। फिर आंसू पोछते हुए कहा कि उन्हें किसी बड़े पद की आवश्यकता नहीं, जो भी अखाड़ा उन्हें धर्म प्रचार में सहयोग करेगा, उसकी संत बनने को तैयार हैं। उनका उद्देश्य केवल सनातन धर्म का प्रचार करना है। शैली ने कहा कि हमारे गुरु ऋषि अजयदास महाराज मेरे पिता समान हैं, घर में जिस तरह बच्चों से गलती होने पर माता-पिता नाराज हो जाते हैं, उसी तरह वे भी मुझसे थोड़े नाराज हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि वे जल्दी ही मान जाएंगे। हां, लेकिन इस बार सिंहस्थ में मैं किन्नर अखाड़े से जुड़कर कार्य नहीं करूंगी। रही बात सेवा की, तो वह धर्म सेविका बनकर सदैव साधु-संतों के चरणों को पूजेंगी।

किन्नर अखाड़े में विवाद के चलते चर्चा में हैं शैली
उज्जैन सिंहस्थ में आई किन्नर अखाड़े की शैली राई लगातार चर्चाओं में बनी हुई हैं। दो दिन पहले शैली राई ने खुद को किन्नर अखाड़े की पीठाधीश्वर बताया था। जबकि किन्नर अखाड़े के ऋषि अजयदास का कहना है कि शैली को अखाड़े से जोड़ा था, उन्हें कोई पद नहीं दिया गया था। इस कारण किन्नर अखाड़े में विवाद उत्पन्न हो गया।

इसलिए हटाया अखाड़े से
ऋषि अजयदास जी का कहना है कि शैली राय ने अखाड़े के नियमों का पालन नहीं किया है और वे अखाड़े में न रहते हुए किसी और के यहां रह रही हैं। जबकि अखाड़े के नियमों के अनुसार अखाड़े से जुड़े किन्नरों को अखाड़ा परिसर में ही रहना चाहिए। उन्होंने कहा था कि शैली राई ने अखाड़े के नियमों का पालन नहीं किया, इस कारण उन्हें अखाड़ा परिषद से हटाया गया। यदि वे अखाड़े के सभी नियमों को पालन करती हैं तो उन्हें पुन: अखाड़ा परिषद में शामिल कर लिया जाएगा।

कौन है शैली राई
शैली राई का जन्म दार्जिलिंग में हुआ था और वे अब छत्तीसगढ़ के रायपुर में रहती हैं। रायपुर में वे एनजीओ चला रही हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य समाज सेवा करना है। शैली राई ने बताया कि किन्नर अखाड़ा अखण्ड महामंडलेश्वर कमला बुआ के मार्गदर्शन में किन्नर समाज को समानता अधिकार दिलाने के लिए प्रयास कर रहा है।

उच्च शिक्षित होने के बाद भी नहीं मिली जॉब
शैली राई ने छत्तीसगढ़ के कॉलेज से ग्रैजुएशन किया है। उन्होंने फैशन डिजाइनिंग में डिप्लोमा कोर्स किया है। साथ ही, एरिना मल्टीमीडिया से भी डिजाइनिंग से संबंधित कोर्स किए हैं। इतनी योग्यता होने के बाद भी उन्हें किसी अच्छी कंपनी में जॉब नहीं मिली। शैली ने कई जगह इंटरव्यू भी दिए, लेकिन किन्नर होने की वजह से उन्हें जॉब नहीं मिल सकी। 







Powered by Blogger.