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मिरिक में अखिल भारतीय नेवार संगठन के अधिवेशन में लगा नृत्य-संगीत का तड़का


मिरिक : अखिल भारतीय नेवार संगठन, मिरिक आंचलिक समिति द्वारा तराई के निरपानी में आयोजित वार्षिक अधिवेशन में विचार मंथन की गंभीरता दिखी, तो वहीं नृत्य-संगीत का तड़का भी लगा। वक्ताओं ने जाति को जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग की, जिसे पारंपरिक परिधान में लाखे नृत्य प्रस्तुत कर कलाकारों ने अपनी सांस्कृतिक समृद्धि के दर्शन कराए व वक्ताओं की मांग को मजबूती प्रदान की। वक्ताओं ने जनजाति की सूची में शामिल करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि जाति के संस्कार, संस्कृति, रीतिरिवाज, परंपरा का संरक्षण आवश्यक है। राज्य एवं केंद्र सरकार के पास संबंधित कागजातों के साथ हमारी मांग लंबित पड़ी है। वक्ताओं ने जाट आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि नेवार के साथ ही 10 अन्य जातियों को भी जनजाति की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। 

सौरेनी समष्टि के जीटीए सभासद अरूण सिंग्ची ने जाति के लोगों को जागरूक बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक घर में नेवारी भाषा का शब्दकोष उपलब्ध कराएंगे। कवि विचंद्र ने काव्य पाठ कर माहौल साहित्यिक बना दिया। मणि जोशी ने सचिव का प्रतिवेदन पेश किया, वहीं अनिल मणि प्रधान ने वार्षिक आय-व्यय का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। नेवारी समुदाय के कलाकारों ने लाखे नृत्य प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में जीटीए के अध्यक्ष प्रदीप प्रधान, सभासद महेंद्र प्रधान, योगवीर शाक्य, पूर्व विधायक डीके प्रधान, पीएल जोशी, बादशाह प्रधान, सुभाष प्रधान, विवेक प्रधान आदि ने संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष गंगा प्रधान, आगंतुकों का स्वागत भरत प्रधान, संचालन अलंकार प्रधान एवं धन्यवाद ज्ञापन रमेश श्रेष्ठ ने किया।

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