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विवाद के बाद अस्तित्व में आया राई बोर्ड, भवन निर्माण के लिए किए चेक प्रदान

दार्जिलिंग : ऑल इंडिया किरांती खम्बू राई सांस्कृतिक संघ एवं खम्बू राइट्स मूवमेंट के बीच चली विवाद के बाद अस्तित्व में आए राई विकास बोर्ड ने अब कार्य करना शुरू कर दिया है। जिलाधिकारी अनुराग श्रीवास्तव ने बोर्ड की ओर से चयनित लाभार्थियों को भवन निर्माण के लिए चेक प्रदान किए। जिलाधिकारी कार्यालय के सभागार में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में राज्य सरकार द्वारा भवन निर्माण के लिए बोर्ड को प्रदान किए गए पांच करोड़ में से प्रथम चरण में 20 परिवारों को एक-एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया। इस संबंध में बोर्ड के चेयरमैन मंगल सिंह राई ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र के तीन महकमों में राई जाति की आबादी 3.5 लाख है। जिले में चार लाख से अधिक राई जाति के लोग हैं। उन्होंने कहा कि इतनी अधिक आबादी में 422 शाखाओं को लेकर बोर्ड अब राई जाति का विकास करने को प्रतिबद्ध है। मंगल ने कहा कि बोर्ड, बगैर किसी भेदभाव के कार्य करेगा। सबका विकास करने की कोशिश की जाएगी।

बोर्ड में संघ ने बाजी मारी
राई विकास बोर्ड के गठन की घोषणा के बाद से ही राई जाति के संगठनों में रार शुरू हो गई थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे, कि खम्बू राइट्स मूवमेंट ने बोर्ड संचालन के मुद्दे को लेकर किरांती खम्बू राई संघ पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कालिम्पोंग के त्रिकोण पार्क में आमरण अनशन तक किया था। परंतु एक बार फिर युवा जोश पर अनुभव भारी पड़ा। नवगठित बोर्ड में बाजी संघ ने मारी। मंगल सिंह राई अध्यक्ष, शंख मणि राई उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए। वहीं, राज्य सरकार ने जिलाधिकारी, डीएलआरओ प्रमुख आदि को लेकर सात कार्यकारी सदस्य व 31 सदस्यीय कार्यकारिणी गठित किया था। गौरतलब है कि खम्बू राइट्स मूवमेंट के प्रतिनिधियों ने कोलकाता जाकर आला अधिकारियों से भी मुलाकात की थी। एक सप्ताह से अधिक समय तक चले आमरण अनशन के दौरान कुछ युवकों की तबीयत भी बिगड़ी। कालिम्पोंग के विधायक एवं जाप के अध्यक्ष डॉ. हर्क बहादुर छेत्री ने मुख्यमंत्री से न्याय सुनिश्चित करने एवं अनशन को व्यर्थ ना जाने देने का आश्वासन मिलने की जानकारी देकर आमरण अनशन समाप्त कराया था।

- जागरण
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