Header Ads

नेपाली PM का इंडिया टूर : भारत-नेपाल मित्रता फिर से पटरी पर दौड़ती नज़र आएगी


कमल प्रसाद घिमिरे  
नई दिल्ली/काठमांडू । सीमा पर मधेस आंदोलन की आग में तप रही भारत-नेपाल मित्रता फिर से पटरी पर दौड़ती नज़र आ सकती है। महीनों चलने वाले विवाद के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की आज से शुरू हो रही भारत यात्रा कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण है। जानिए आखिर क्यों ज़रूरी हो चली है पड़ोसी देश नेपाल की ये यात्रा ?

भौगोलिक राजनीति
- भारत और नेपाल के बीच 1,850 किमी लंबा बॉर्डर है।
- वो राज्य जिनकी सीमा नेपाल से छूती हैं: सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड।

ख़ास रिश्ता
- 1950 में शांत‌ि और दोस्ती के लिए प्रतिबद्ध इंडो-नेपाल संध‌ि ने नेपाल‌ियों को भारतीय जनता के समान शिक्षा और आर्थिक अवसर देने की बात कही गई।
-  भारत नेपाली नागरिकों को सिविल सेवा सहित दूसरी सरकारी सेवाओं में हिस्सा लेने की आज़ादी है।
-  भारत-नेपाल का बॉर्डर खुला हुआ है. वहां जाने के लिए किसी वीज़ा और पासपोर्ट की ज़रूरत नहीं पड़ती।

घर में रहकर घर से दूर
- भारत में करीब 60 लाख नेपाली काम करते हैं।
- 45 हज़ार से ज़्यादा नेपाली नागरिक भारतीय सेना और पैरामिल‌‌िट्री में काम करते हैं।
- करीब 6 लाख भारतीय नेपाल में रहते हैं।

आर्थिक दोस्ती
- भारतीय कंपनियां नेपाल में सबसे बड़ी निवेशक है।
- नेपाल में 2,539 करोड़ की एफडीआई भारतीय प्रोजेक्टों के ज़रिए आती है. जो नेपाल की करीब कुल एफडीआई का 40% है।
- 150 से भारतीय उपक्रम नेपाल में काम कर रहे हैं।
- इनमें आईटीसी , डाबर इंड‌िया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एशियन पेंट, मणिपाल ग्रुप, एस्सेल इंफ्रा प्रोजेक्ट और टाटा पावर जैसी कंपनियां शुमार हैं ।

व्यापारिक दोस्ती
- नेपाल के कुल का कारोबार में 66% व्यापार भारत के साथ होता है।
- 26,127 करोड़ मूल्य के व्यापारिक रिश्ते हैं नेपाल के भारत के साथ।
- 3187 करोड़ वैल्यू का कुल निर्यात नेपाल से भारत होता है।
- 22,393 करोड़ का माल नेपाल में भारत से निर्यात होता है। 

विवाद के कुछ मुद्दे
 - पानी का बंटवारा दोनों मुल्कों के बीच विवाद का विषय है।
- सुस्ता और कालापानी जैसी नदियों को लेकर दोनों देशों में क्षेत्रीय विवाद है।
- हाल‌िया सीमाबंदी ने दोनों देशों के रिश्तों को बिगाड़ के रख दिया था।
- नेपाल ने संव‌िधान निर्माण प्रक्रिया में भारत की दखलअंदाज़ी पर आपत्ति जताई थी।

ड्रैगन की परछाईं
- भारत नेपाल से ईंधन हासिल करने वाला अकेला देश नहीं रहा।
- हाल‌िया सीमाबंदी के कारण चीन ने नेपाल से ईंधन लेने की प्रक्रिया में कुछ कदम बढ़ाए हैं।
- नेपाल अपने पूर्वोत्तर पड़ोस‌ियों के साथ व्यापार की राहें खोल रहा है।
- साल दर साल नेपाल में चीनी निवेश की तादाद बढ़ती जा रही है।
- नेपाल ने हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट बनाने के ‌लिए चीनी कंपनी की मदद ली।
- 1.6 अरब डॉलर की कीमत से ये प्रोजेक्ट तैयार किया जा रहा है।

कैसा होगा भविष्य
भारत को नेपाल के साथ अपने संबंधों में सुधार करना चाहिए क्योंकि चीन-पाकिस्तान के हाल‌िया हालातों के मद्देनज़र ऐसा करना बेहद ज़रूरी है
Powered by Blogger.