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जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग बोले 'देश को बताएंगे गोरखालैंड जरूरी क्यों?'


दार्जिलिंग : केंद्र की सत्ता पर काबिज भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने गोजमुमो की मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है। फिर भी हम नेपाली भाषी भारतीय गोरखाओं को पश्चिम बंगाल से अलग होकर अलग राज्य गोरखालैंड क्यों चाहिए? यह देशवासियों को बताएंगे। उक्त उद्गार गोजमुमो सुप्रीमो एवं जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग ने व्यक्त किए। वे शहर के गोरखा रंगमंच भवन में गोजयुमो केंद्रीय समिति की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अलग राज्य, वर्षो से गोरखाओं का सपना रहा है। छोटे राज्यों की हिमायती रही भाजपा के नेृत्व में सरकार बनने के बाद उम्मीदों को एक बार फिर पर लग गए हैं। जीटीए प्रमुख ने कहा कि गोरखालैंड राज्य की मांग को पूर्ण कराने एवं राज्य की आवश्यकता से देशवासियों को अवगत कराने के लिए नई दिल्ली तक पद यात्रा करेंगे व लोगों को अपनी मांग के विविध पहलुओं से अवगत कराएंगे। 

वहीं, बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए गोजयुमो के प्रियव‌र्द्धन राई ने कहा कि गोरखालैंड गठन के विषय पर मार्च माह में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित करेगा। साथ ही दार्जिलिंग में विराट जनसभा भी की जाएगी। उन्होंने कहा कि गोजयुमो की केंद्रीय कार्यकारिणी में सदस्य संख्या 32 से बढ़ाकर 50 से अधिक करने, तराई, डुवार्स एवं कालिम्पोंग क्षेत्र के सदस्यों को प्रमुखता देने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। राई ने कहा कि महकमा एवं खंड स्तर पर सांगठनिक मजबूती पर चर्चा करने के साथ ही जनता एवं पार्टी समर्थकों की समस्याओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने जन आंदोलन पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि यह पार्टी भी तृणमूल कांग्रेस ही है। जिसका गठन केवल विधानसभा चुनाव के लिए किया गया है। चुनाव बाद जाप का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। राई ने पट्टे को लेकर जाप के आंदोलन पर कहा कि मोर्चा ने जीटीए समझौते में भी पट्टे का उल्लेख कराया है। यह प्रक्रिया चल भी रही है। इसलिए इसका पार्टी की सेहत पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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