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खम्बू राई विकास बोर्ड में राजनीति के खिलाफ त्रिकोण पार्क में आमरण अनशन


कालिम्पोंग : राई विकास बोर्ड के गठन में किरांति खम्बू राई सांस्कृतिक संस्थान द्वारा राजनीति किए जाने का आरोप लगाते हुए इसके खिलाफ खम्बू समाज के 14 युवकों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। 'कालिम्पोंग का जंतर-मंतर' के तौर पर प्रसिद्ध त्रिकोण पार्क में आमरण अनशन पर बैठने वालों में खम्बू राइट्स मूवमेंट, टाउन कमेटी एवं बोर्ड डिमांड कमेटी के युवक शामिल हैं। अनशन की शुरुआत अपराह्न 3.30 बजे मांगपा द्वारा खम्बू परंपरा के अनुसार पूजन से हुई। मांगपा एवं खम्बू राइट्स मूवमेंट के प्रतिनिधियों ने अनशनकारियों को खदा ओढ़ाकर शुभकामनाएं दीं। अनशनकारियों में सहदेव राई, सफल सोतांग, सुदीप राई, सूरज राई, सुरेन राई, डेमन राई, सुभाष हांग राई, डिल्बर्ट राई, राजेन राई, सुनील राई, लॉरेंस राई, दीपेश राई, क्रिस्टोफर राई एवं आनंद राई शामिल हैं। इनका आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा 24 जनवरी को खम्बू राई विकास बोर्ड के गठन की घोषणा किए जाने के बाद किरांति खम्बू राई सांस्कृतिक संस्थान के कुछ प्रतिनिधि बोर्ड संचालन का दावा करते हुए राजनीति कर रहे हैं।

सरकार नहीं, अपनों से है लड़ाई
आमरण अनशन के संबंध में मूवमेंट के प्रवक्ता मनोज राई ने कहा कि यह लड़ाई सरकार नहीं, अपनों से है। राज्य सरकार ने हमें विकास बोर्ड का तोहफा देने की घोषणा की, जिसके लिए हम सरकार के प्रति आभारी हैं। उन्होंने कहा कि हमारी जाति में कुछ ऐसे तत्व हैं, जो बोर्ड में बाधा पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। राई ने कहा कि सरकार यदि इस गतिरोध का समाधान आम सहमति से सुनिश्चित नहीं कराती है, तो अनशन जारी रखने के साथ ही आंदोलन को और तीव्र किया जाएगा। संस्थान के दो चार प्रतिनिधि सरकार को भ्रम में डालने का काम कर रहे हैं। इन लोगों ने पूर्व में बोर्ड गठन एवं जनजाति का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि बोर्ड के संचालन को दावा ठोंकने वाले विकास बोर्ड को स्वयं द्वारा की गई पहल के साक्ष्य सार्वजनिक करें। उनके कृत्य से राई जाति के सुविधाओं से वंचित होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। मनोज ने ऐसा करने वाले लोगों के घरों का घेराव करने की भी चेतावनी दी।

संस्थान ने खारिज किए आरोप
विवादों से घिरे किरांति खम्बू राई सांस्कृतिक संस्थान ने आरोपों को खारिज कर दिया है। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए संस्थान की महकमा समिति के सचिव अरुण प्रकाश राई ने कहा कि सभी आरोप निराधार हैं। हम कभी भी बोर्ड के खिलाफ नहीं थे। उन्होंने कहा कि जहां वे प्रदर्शन आदि कर रहे थे, वहीं हम कागजी कार्यवाहियों को अंजाम देने में जुटे थे। राई ने कहा कि बोर्ड मिल जाने के बाद जाति को बदनाम करने की बजाय सांगठनिक स्तर पर समस्याओं का समाधान किया जाए तो बेहतर होगा।



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