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रेल बजट 2016 : पूर्वोत्तर जाने के लिए न करना पड़े हफ्ता भर इंतजार


नई दिल्ली। ‘सेवन सिस्टर्स’ को देश के बाकी हिस्सों की तरह रेल के बड़े नेटवर्क में जोड़ने और गतिमान करने की पहल का पूर्वोत्तर के राज्यों के युवाओं ने दिल खोल कर स्वागत किया है। रेल बजट प्रस्ताव पेश करते हुए प्रभु ने पूर्वोत्तर राज्यों में बेहतर रेल संपर्क व्यवस्था का एलान किया है। मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए दावा किया कि सरकार ने असम में बहुप्रतिक्षित बड़ी लाइन पर लमडिंग-सिलचर खंड को खोल दिया है। और इस तरह बराक घाटी को शेष देश से जोड़ दिया है। इसके अलावा त्रिपुरा की राजधानी अगरतला को बड़ी लाइन नेटवर्क पर ले आने की घोषणा की है। रेल ने मिजोरम व मणिपुर के लिए भी कटखल-भैराबी और अरुणाचल-जीरीबाम की आमान परिवर्तन परियोजनाएं जल्द ही खोलने की घोषणा की है। दिल्ली विश्वविद्यालय के भाष्कर चेटिया ने कहा कि 70 साल से उपेक्षित पड़े इस इलाके के लिए ये घोषणाएं अहम हैं। देर आयद दुरुस्त आयद के जुमले को दोहराते हुए चेटिया ने कहा कि सप्ताहिक ट्रेनों को रोजाना करने की जरूरत है। मणिपुर के आईके सालाम ने कहा कि सरकार की घोषणा आशा की किरण है। लेकिन रेलवे परियोजना को पूरा करवाना भी एक चुनौती है क्योंकि कई संगठन हथियारबंद हैं और वे इसे आसानी से पूरा नहीं होने देंगे। उन्होंने चीनी चुनौती की ओर इशारा करते हुए कहा कि रेलवे को पुलिस सुरक्षा में अपने प्रोजेक्ट पूरे करने चाहिए। अलगाववादी गुटों की कोशिसों को नाकाम करना होगा। वे निश्चित तौर पर राज्य में कुछ भी बेहतर नहीं होना देना चाहेंगे। नागा, बोडो के कई गुट कुछ और सोचते हैं।

अरुणाचल प्रदेश की छात्रा मिनाम लेगो ने कहा कि हमें लगा कि हम भी भारतीय हैं। सालों से अरुणाचल प्रदेश उपेक्षित क्यों था? पहले बस से गुवाहाटी फिर कहीं और जाने का विकल्प था। शायद अब खत्म हो! साप्ताहिक ट्रेनें छूट जाने पर यहां फिर हफ्ता इंतजार करने की जद्दोजहद भी सरकार खत्म कर दे तो और अच्छा हो। उन्होंने कहा कि रेलवे को अरुणाचल के हर जिला मुख्यालयों के पास बनाया जाना चाहिए और इसे चीन-भारत संबंधों के कूटनीतिक नजरिए से भी देखना चाहिए। नागरिक चीन से ज्यादा भारत की ओर मुखातिब हो सकें। मणिपुर की सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर संगीता ने कहा कि मणिपुर के बेरोजगार युवा अब रोजगार के लिए आसपास ही नहीं बल्कि महानगरों के लिए भी कूच कर सकते हैं। दुनिया देख सकते हैं। असम की रहने वालीं और जेएनयू में छात्र संघ अध्यक्ष पद की दावेदारी कर चुकीं वेलेंटीना ब्रह्मा ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों में बेहतर रेल संपर्क व्यवस्था न केवल सामाजिक बल्कि आर्थिक रूप से फायदेमंद होगी। सुगम पहुंच होने से वहां के पर्यटन उद्योग को फायदा पहुंचेगा। बाकी देश अपने ‘सेवन-सिस्टर्स’ से मिलने पहुंचेगा। दूसरी ओर वहां का आम समाज भी प्रगति से रूबरू होगा।

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