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पहली बार नार्थ सिक्किम की पहाड़ियों में दिखा स्नो लेपर्ड, EXCLUSIVE PHOTOS मीडिया के सामने आईं


गैंगटॉक : World Wide Fund for Nature (WWF) ने कुछ फोटो जारी कर सिक्किम के उत्तर में हिमालय की पहाड़ियों में स्नो लेपर्ड की मौजूदगी का दावा किया है। दरसअल हिम तेन्दुआ (Uncia uncia) एक विडाल प्रजाति है जो मध्य एशिया में रहती है। यद्यपि हिम तेन्दुए के नाम में "तेन्दुआ" है लेकिन यह एक छोटे तेन्दुए के समान दिखता है और इनमें आपसी सम्बन्ध नहीं है। बता दें कि कुछ दिन पहले लद्दाख के हेमिस नेशनल पार्क में भी ट्रैकिंग के दौरान स्नो लेपर्ड देखा गया था। टूरिट्स ने उसकी कुछ रेयर फोटोज को कैमरे में कैद किया था।

ये हैं लेपर्ड की खासियतें...
- स्नो लेपर्ड भारत में पाई जाने वाली लेपर्ड की चार प्रजातियों में से एक है।
- आमतौर पर यह हिमालय के पहाड़ी इलाकों में रहता है।
- सफेद बर्फ से घिरे पहोड़ों में आसानी से छिप सकता है।
- इसकी फोटो खींचना आसान नहीं, यह पलभर में ही से ओझल हो जाता है।
- स्नो लेपर्ड जंगली गधा, जंगली बकरा, भेड़ आदि का शिकार करता है।

स्नो लेपर्ड का गढ़ है हेमिस नेशनल पार्क
- लद्दाख का हेमिस नेशनल पार्क स्नो लेपर्ड समेत कई और दुर्लभ जीवों की प्रजातियों का गढ़ माना जाता है।
- यहां गर्मियों में मौसम अच्छा होता है और पार्क के अंदर ट्रैकिंग के लिए उत्साही एडवेंचर टूरिस्ट अक्सर यहां पहुंचते हैं।


रंगरूप
हिम तेन्दुए लगभग 1.4 मीटर लम्बे होते हैं और इनकी पूँछ 90-100 सेमी तक होती है। इनका भार 75 किलो तक हो सकता है। इनकी खाल पर सलेटी और सफ़ेद फ़र होता है और गहरे लाल रंग के धब्बे होते हैं और पूँछ पर धारियाँ बनीं होती हैं। इनका फर बहुत लम्बा और मोटा होता है जो इन्हे ऊँचे ठण्डे स्थानो पर भीषण सर्दी से बचा कर रखता है। इन तेन्दुओं के पैर भी बड़े और ऊनी होते हैं, ताकि हिम में चलना सहज हो सके। ये लगभग 15 मीटर की ऊँचाई तक उछल सकते हैं। ये बिल्ली-परिवार की एकमात्र प्रजाति है जो दहाड़ सकती है लेकिन घुरघुरा (बिल्ली के जैसी आवाज़ निकालना) नहीं सकती।

जीवन
हिम तेन्दुए अधिकांशतः रात्री में सक्रिय होते हैं। ये अकेले रहने वाले जीव हैं। लगभग 90-100 दिनों के गर्भाधान के बाद मादा 2-3 शावकों को जन्म देती है। यह बड़ी आकार की बिल्लियाँ है और लोग इनका शिकार इनके फर के लिए करते हैं।

फैलाव
हिम तेंदुए वर्तमान में अफगानिस्तान, भूटान, चीन, भारत, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, नेपाल, पाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान में एशिया तक ही सीमित है और संभवतः भी म्यांमार है। इसकी भौगोलिक वितरण पूर्वी अफगानिस्तान में हिंदू कुश से चलाता है और दक्षिणी साइबेरिया के लिए पामीर पर्वतमाला, काराकोरम और हिमालय के पहाड़ों के माध्यम से, सीमा बयकाल झील के पश्चिम में रूसी अल्ताई पर्वत शृंखला और पहाड़ों को शामिल किया गया है। तिब्बत में, यह उत्तर में  ऊपर पाया जाता है।

जनसंख्या और संरक्षित क्षेत्रों
हिम तेंदुए की कुल जंगली आबादी 4510 के लिए 7350 व्यक्तियों पर अनुमान लगाया गया था। 1972 में, प्रकृति के संरक्षण (आईयूसीएन) के लिए अंतर्राष्ट्रीय संघ विश्व स्तर पर "लुप्तप्राय" के रूप में संकटग्रस्त प्रजाति के अपने लाल सूची पर हिम तेंदुए रखा, उसी खतरा वर्ग 2008 में किए गए आकलन में लागू किया गया था। दुनिया भर के चिड़ियाघरों में लगभग 600 बर्फ तेंदुओं भी कर रहे हैं।

देश       क्षेत्रफल किलोमीटर   अनुमानित जनसंख्या
अफगानिस्तान     50,000     100–200?
भूटान     15,000     100–200?
चीन     1,100,000     2,000–2,500
भारत     75,000     200–600
कजाकिस्तान     50,000     180–200
किर्गिस्तान     105,000     150–500
मंगोलिया     101,000     500–1,000
नेपाल     30,000     300–500
पाकिस्तान     80,000     200–420
ताजिकिस्तान     100,000     180–220
उजबेकिस्तान     10,000     20–50

प्रतीक
हिम तेंदुए पशु इर्बिस् के रूप में जाना जाता है जहां मध्य एशिया के तुर्की लोगों के लिए प्रतीकात्मक अर्थ है, इसलिए यह व्यापक रूप से एक प्रतीक के रूप में प्रयोग किया जाता है। हिम तेंदुए तातारी और कजाख के लिए एक राष्ट्रीय प्रतीक है: एक हिम तेंदुए अलमाती के शहर के सरकारी मुहर पर पाया जाता है और एक पंख हिम तेंदुए तातारस्तान प्रतीक पर पाया जाता है।




फ़ाइल फोटो

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