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जीटीए के कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा नौमंती बाजा के साथ शुरू हुआ कृषि एवं बागवानी मेला

दार्जिलिंग : जीटीए के कृषि एवं बागवानी विभाग द्वारा जामुने में आयोजित कृषि एवं बागवानी मेले का रविवार को नौमंती बाजे के वादन के साथ शुभारंभ हो गया। जीटीए के उप प्रमुख कर्नल (अवकाश प्राप्त) रमेश आले ने बतौर मुख्य अतिथि फीता काटकर एवं दीप प्रज्ज्वलित कर पांच दिवसीय मेले का उद्घाटन किया। उन्होंने किसानों को जागरूक करना ही मेले के आयोजन का मुख्य उद्देश्य बताया। मेले के पहले दिन कृषि एवं बागवानी से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा हुई। वहीं, कृषि विभाग की ओर से वाटर स्प्रे का वितरण किया गया। इस अवसर पर नौमंती बाजे के साथ ही कलाकारों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान विभागीय सभासद कल्याण देवान ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। पहले दिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता कार्यक्रम हुए, वहीं कंचनजंघा नृत्य अकादमी व सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग के कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। 

आयोजकों से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को कृषि विभाग की ओर से कृषि संबंधी जागरुकता कार्यक्रम, स्वास्थ्य जागरुकता, मंगर संघ दार्जिलिंग एवं मधुरिमा समूह के कलाकारों का सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। 26 जनवरी को कृषि संगोष्ठी, स्वाइल कंजरवेशन विभाग की ओर से संगोष्ठी, स्वास्थ्य जागरुकता, अखिल भारतीय गुरुंग संघ संगिनी नृत्य समूह, विजनबाड़ी एवं कलाकार संगठन सोनादा के कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 27 जनवरी को कृषि एवं पशुओं के स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां देने के उद्देश्य से संगोष्ठी, सदा समीर नृत्य समूह व सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग, मिरिक के कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। 28 जनवरी को स्वास्थ्य संबंधी जागरुकता कार्यक्रम, अखिल भारतीय तमांग बौद्ध संघ की दार्जिलिंग शाखा, सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग कर्सियांग के कलाकारों के कार्यक्रमों के साथ मेले का समापन हो जाएगा।

पिछले वर्ष जैसी रौनक नहीं
कृषि एवं बागवानी मेले में पिछले वर्ष जैसी रौनक नहीं दिखी। इस दफे मेले में वन संपदा, स्वास्थ्य एवं कृषि संपदा से जुड़े यंत्रों की छोटे स्तर पर ही प्रदर्शित किए गए हैं।

खली विमल की गैर मौजूदगी
जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग की गैर मौजूदगी समर्थकों को बहुत खली। कार्यक्रम में उपस्थित कई लोगों ने कहा कि दाजू के ना होने से मेला बेरंगत नजर आ रहा है। उनकी उपस्थिति मात्र कार्यक्रमों में रंगत लाने को काफी होती है।

- जागरण

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