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गोरखालैंड की मांग में बाधा नहीं एकीकरण की मांग : गोरखा राष्ट्रीय कांग्रेस


दार्जिलिंग : गोरखा राष्ट्रीय कांग्रेस के 13 वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि दार्जिलिंग सिक्किम के एकीकरण की हमारी मांग गोरखालैंड राज्य की मांग में बाधा नहीं है। नगर के चौक बाजार गीतांगे डाडा में हुई जनसभा में गोरखालैंड राज्य बनाने में कठिनाई होने पर एकीकरण संबंधी विमल गुरुंग के बयान का स्वागत करते हुए कहा कि इसके लिए पार्टी कार्यकर्ता मोर्चा के झंडे तले आंदोलन को भी तैयार हैं। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष अशोक लेप्चा ने कहा कि ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर भारत सरकार को यह प्रस्ताव स्वीकार करना पड़ेगा। सन 1986 के गोरखालैंड आंदोलन के समय पश्चिम बंगाल सरकार ने श्वेत पत्र जारी कर दार्जिलिंग जिले को सिक्किम का भू भाग बताया था। 

उन्होंने कहा कि क्षेत्रवासियों की भाषा, संस्कृति, पहचान एवं रीति-रिवाज एक होने के कारण इसमें कोई दिक्कत भी नहीं होनी चाहिए। लेप्चा ने कहा कि एकीकरण के बाद सभी का संरक्षण करके देश में अलग पहचान बनाई जा सकती है। गोराकां अध्यक्ष ने कहा कि भाषा एवं संस्कृति के साथ अगर एक नए राज्य के गठन के समय देश को जिस तरह की संवैधानिक, प्रशासनिक, भौतिक संरचना एवं अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। एकीकरण के द्वारा उनसे भी बचा जा सकता है। वहीं, अन्य वक्ताओं ने कहा कि पश्चिम बंगाल की राजधानी भी दार्जिलिंग से छह सौ किमी दूर है। अगर एकीकरण होता है, तो प्रशासनिक सुविधाओं के लिए भाषा, मौसम एवं दूरी जैसी समस्याएं भी आड़े नहीं आएंगी। अपने क्षेत्र में ही सभी समस्याओं का निवारण सुनिश्चित हो सकेगा। बड़ी संख्या में पहुंचे गोराकां समर्थकों को अमर लक्सम, नीमा लामा, भरत डी, नीमा तमांग, सुबोध पाखरिन आदि शामिल थे। गौरतलब है कि कुछ माह पूर्व जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग ने बयान दिया था कि यदि राज्य गठन में ज्यादा कठिनाई हो तो केंद्र सरकार दार्जिलिंग का सिक्किम में ही विलय कर दे।

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