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पठानकोट हमला :एयरफोर्स कमांडो समेत 3 जवान शहीद, NSA अजीत डोभाल की निगरानी में उच्चस्तरीय बैठक


पठानकोट: पंजाब के पठानकोट स्थित एयरफोर्स बेस पर हुए हमले में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में सभी चार आतंकी मार गिराए गए हैं। हमले में गरुड़ कमांडो के एक जवान समेत तीन जवान शहीद हुए हैं। मुठभेड़ भले ही ख़त्म हो गई है, लेकिन सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है। कुछ और आतंकियों के इलाक़े में छिपे होने की आशंका है। एयरफोर्स स्टेशन के 80 प्रतिशत एरिया को सैनिटाइज कर लिया गया है। बचे हुए एरिया में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है। आतंकियों की बॉडी मिलनी बाकी है। पूरी घटना पर दिल्ली में उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक जारी है, जिसकी निगरानी राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल खुद कर रहे हैं। हमले के बाद उत्तर भारत के सभी एयरफोर्स स्टेशनों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इस बीच जांच में एनआईए की टीम भी जुट गई है और पठानकोट पहुंच गई है।

इस हमले के बाद सुरक्षा अमले में अंदरूनी उठापटक होने की संभावना है, क्योंकि इस आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पाकिस्तान के प्रति अपनी निजी पहुंच को न्यायसंगत साबित कर पाना मुश्किल होगा। दरअसल, शनिवार सुबह तीन बजे के करीब आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया था। सभी आतंकी सेना की वर्दी में आए थे। आतंकियों की रिकॉर्ड की गई बातचीत के उच्चारण की एनालिसिस से पता चला है कि वे पाकिस्तान के दक्षिण पंजाब इलाके के थे। खुफिया सूत्रों ने बताया है कि आतंकी जैश ए मोहम्मद के थे।

अलर्ट के बावजूद सफल हो गए आतंकी
बड़ी बात यह है कि इस घटना का अलर्ट शुक्रवार को ही मिल गया था। गुरुदासपुर के एसपी के अपहरण से पहले ही आतंकियों की बातचीत को खुफिया एजेंसियों ने रिकॉर्ड कर लिया था। इसके आधार पर ही इस हमले का डेफिनेट अलर्ट जारी करके मल्टी एजेंसी काउंटर-प्लान एक्टीवेट किया गया था। इसके बावजूद आतंकवादियों का सफल हो जाना, भारी चूक माना जा रहा है, क्योंकि सेना की स्पेशल फोर्स के दो कॉलम (डेढ़ सौ के लगभग जवान) भी बेस के अंदर तैनात किए गए थे। इतना ही नहीं वायुसेना के 'गरुड़' कमांडोज़ भी तैनात थे, लेकिन बावजूद इसके आतंकवादी सुरक्षा का पहला घेरा तोड़ने में कामयाब रहे। जहां गेट पर तैनात डीएससी के दो जवानों को उन्होंने मार दिया। पुख्ता अलर्ट के बावजूद आतंकियों का बेस में घुसने में सफल हो जाना सुरक्षा में भारी चूक है। वायुसेना का यह स्टेशन मिग-29 और अटैक हेलीकॉप्टर का बेस है। इस हमले में वायु सेना के सारे विमान सुरक्षित बताए जा रहे हैं। पूरे इलाकों को सुरक्षा बलों ने घेरा हुआ है।

हो सकता था बड़ा नुकसान
कुल छह एयरफोर्स जवान घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बड़ी बात यह है कि अगर आतंकी सुरक्षा का दूसरा घेरा तोड़ने में सफल होते, तो भारी नुकसान हो सकता था। आतंकी तकनीकी एरिया में घुसने में नाकामयाब रहे, जहां वायुसेना के लड़ाकू विमान मिग-21 बाइसन, एमआई-25, एमआई-35 अटैक हेलीकॉप्टर रहते हैं। विमान खुद अपने आप में किसी बम की तरह होते हैं, क्योंकि उनमें फ्यूल भरा होता है। अगर इनमें विस्फोट हो जाता, तो बड़ी घटना हो सकती थी।

एयरफोर्स का महत्वपूर्ण एयरबेस

आतंकियों की कोशिश किसी होस्टेज क्राइसिस को अंजाम देने की भी थी, लेकिन वो तकनीकी एरिया में दाखिल होने में सफल नहीं हो पाए। पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन का इस्तेमाल कारगिल और 1971 के युद्ध के दौरान पाकिस्तान पर हमले में हुआ है। यहां से पाकिस्तान की सीमा महज 40 किमी के आसपास है। इससे पहले पठानकोठ में सेना की वर्दी पहने चार-पांच संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकियों ने एक पुलिस अधीक्षक और दो अन्य लोगों का गुरुवार रात अपहरण कर लिया था। इन संदिग्ध आतंकियों ने उन लोगों के साथ मारपीट की और कुछ दूरी पर उन्हें छोड़कर गाड़ी से भाग गए थे। पाकिस्तान की सीमा से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर घटी इस घटना के बाद राज्य भर में हाई अलर्ट जारी कर दिया था। ऐसी आशंका है कि पुलिस अधीक्षक के अपहरण में शामिल आतंकी ही इस हमले में शामिल हैं।




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