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गोरखा युवा वर्ग मास्टर मित्रसेन के आदर्शो व व्यक्तित्व से प्रेरणा ले : भूपेंद्र सिंह गुरंग


धर्मशाला : मास्टर मित्रसेन का साहित्य सृजन ही नहीं, समाज के उत्थान में भी अहम योगदान रहा है। उन्होंने अपने गीत, संगीत व नाटकों के जरिए समाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए भी भूमिका निभाई है। वर्तमान में युवा वर्ग को मास्टर मित्रसेन के व्यक्तित्व और आदर्शो से प्रेरणा लेनी चाहिए। यह बात हिमाचल-पंजाब गोरखा एसोसिएशन के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह गुरंग ने मित्रसेन के 120वें जन्मदिवस पर आयोजित शोभायात्रा के बाद उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि मास्टर मित्रसेन ने आधा जीवन धर्मशाला व इसके आसपास के क्षेत्रों में स्वतंत्रता आंदोलन की अलख जगाने में व्यतीत किया। उन्होंने अपनी रचनाएं भले ही नेपाली भाषा में रचित की हों, लेकिन आजादी और मानवता के प्रचार प्रसार के लिए हिंदी व उर्दू भाषा के मिश्रित रूप का प्रयोग किया। 

युवा वर्ग में जागृति लाने व महिलाओं के कल्याण के लिए कई खंड काव्यों का सृजन किया। वहीं महात्मा गांधी, महात्मा बुद्ध व टालस्टाय के विचारों को नेपाली भाषा में अनुवाद कर अनुवादक के रूप में भी पहचान बनाई। शास्त्रीय संगीत का ज्ञान होने पर उन्होंने भजन-कीर्तन व गीत-संगीत से भी समाज को जागृत किया। इससे पूर्व गोरखा समुदाय ने हनुमान मंदिर धर्मशाला से शोभायात्रा का आयोजन किया। इस दौरान चीलगाड़ी व श्याम नगर की भजन मंडलियों ने मित्रसेन के रचित भजनों का गायन किया। शोभायात्रा दाड़ी से होती हुई श्याम नगर धर्मशाला गोरखा भवन में पहुंची। इसमें 17 गांवों के मुखिया व भारी संख्या में गोरखा समुदाय के लोग उपस्थित थे।








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