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GTA प्रमुख विमल गुरुंग बोले राई जाति ने प्रस्तुत किया एकता का उदाहरण

दार्जिलिंग : लंबे अरसे से जातीय विकास बोर्ड की मांग करते रहे ऑल इंडिया किरात खम्बू राई एसोसिएशन ने बोर्ड मिलने पर भी ठुकराने का एलान करके गोरखाओं की एकता का अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। यह विकास बोर्ड के पीछे भाग रहीं गोरखा जातियों के लिए भी एक अच्छी सीख है। उक्त बातें जीटीए प्रमुख विमल गुरुंग ने कहीं। उन्होंने कहा है कि यह जातीय विभाजन की मुहिम चला रहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भी अच्छा जवाब है। इससे गोरखालैंड राज्य की प्राप्ति के लिए आंदोलन को भी बल मिलेगा। गुरुंग ने माताओं का उदाहरण देते हुए कहा है कि सौतेली मां द्वारा दिए गए अमृत से भी ज्यादा बेहतर सगी मां द्वारा दिया गया सूखा भोजन होता है। उन्होंने कहा है कि गोरखा जातियों में 35 फीसदी आबादी अकेले राई जाति की है। इस एक तिहाई गोरखा आबादी ने बोर्ड ठुकराने की घोषणा कर गोरखाओं को गौरवांवित किया है। 

अपनी मिट्टी एवं अपने अपनों को पश्चिम बंगाल की दासता से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से किए गए इस त्याग को हमेशा याद किया जाएगा। जीटीए प्रमुख ने सभी से इसी तरह की पहल करने की अपील की है। गौरतलब है कि जनजाति की सूची में शामिल करने की मांग को लेकर वर्षो से संघर्षरत लिम्बू अर्थात सुब्बा जाति के लोग भी विकास बोर्ड गठित करने की मांग कर रहे थे। जनजाति का दर्जा तो प्राप्त हो गया, परंतु बोर्ड गठन की रेस में जाति पिछड़ गई। गत दिनों मंगर विकास बोर्ड के गठन की घोषणा के समय मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राई जाति की मांग लंबित होने का उल्लेख करते हुए सकारात्मक संकेत भी दिए थे। ऐसे में बिल्कुल मुहाने पर आकर एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन राई दुमी ने राज्य सरकार पर जातीय विभाजन का आरोप लगाते हुए बोर्ड गठित किए जाने पर अस्वीकार करने की घोषणा की थी। जिससे परेशानियों से घिरे मोर्चा को सहारा मिल गया है।

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