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बेहद दिलचस्‍प होते हैं झारखंड के गोरखा आर्म्ड पुलिस की दुर्गा पूजा

रांची : शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही जैप वन आवासीय परिसर में कलश स्थापना के साथ अनुष्ठान शुरू हो गया है। गोरखा बटालियन की ओर से वर्ष जैप वन परिसर में 1880 से आयोजित हो रही दुर्गा पूजा कई मायनों में अलग है। एक तो यहां कभी मूर्ति की स्थापना नहीं होती और न ही 10 बाहू वाली मां दुर्गा की पूजा होती है। बल्कि कलश पर ही मां दुर्गा की अराधना होती है। साथ में होते हैं एके 47 जैसे हथियार. नौ दिनों तक लगातार अखंड दीप जलता है। जैप वन के समादेष्टा अमोल वेणुकांत होमकर कहते हैं कि इस बार भी 70 कलश स्थापित हुए हैं और उतने ही अखंड दीप जल रहे हैं। पूजा के मौके पर यहां फायरिंग और सलामी के अलावा गाने बाजे की भी परंपरा है। मंगलवार को भी बैगपाइप्स की धुन पर गोरखा के जवान जम कर झूमे।

शक्ति अवतार की अराधना
गौरतलब है कि राजधानी में बड़ी संख्या में गोरखा परिवार रहते हैं। ज्यादातार नेपाल हाउस के आसपास निवास करते हैं और जैप वन से जुड़ कर देश व राज्य की रक्षा में लगे हैं। यह परिवार दुर्गा के शक्ति अवतार की अराधना करते हैं और जान दांव पर लगा कर रक्षा में लगे अपने परिजनों के दीर्घायु होने की कामना करते हैं।

1943 में हुई थी मूर्ति पूजा
गोरखा परिवार के बड़े बुजुर्ग बताते हैं कि जैप वन आवासीय परिसर में बस एक बार वर्ष 1943 में दुर्गा मां की मूर्ति बैठा कर पूजा की गई थी। पर उस साल कुछ ऐसी घटनाएं घटी, कि इस समाज ने मान लिया की मूर्ति स्थापना उनके लिए शुभ नहीं है। फिर कभी मूर्ति की स्थापना नहीं की गई और कलश को ही मां दुर्गा का रूप माना गया।

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