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चार दशकों से अटकी वन रैंक वन पेंशन (OROP) मंजूर


नई दिल्ली :  पिछले तीन महीने से वन रैंक वन पेंशन के लिए राजधानी के जंतर-मंतर पर आंदलोन कर रहे पूर्व सैनिकों की ज्यादातर मांगें सरकार ने मान ली है। रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने चार दशकों से अटकी वन रैंक वन पेंशन को मंजूर कर लिया है। उन्होंने कहा कि इस पर 8 से 10 हजार करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा। रक्षा मंत्री ने कहा,' पेंशन का रिविजन हर पांच साल पर किया जाएग।' गौरतलब है कि आंदलोन कर रहे पूर्व सैनिक दो साल पर पेंशन रिविजन की मांग कर रहे हैं। पूर्व सैनिकों को इस व्यवस्था का लाभ जुलाई 2014 से मिलेगा और इसकी गणना के लिए 2013 को आधार वर्ष माना जाएगा। 

अधिकतम और न्यूनतम पेंशन का औसत पूर्व सैनिकों की समान रैंक पर पेंशन और पूरी पेंशनेबल सर्विस पर रिटायर होने वाले पूर्व सैनिकों की पेंशन होगी। पहले ही इस औसत से ज्यादा पेंशन ले रहे पूर्व सैनिकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। हालांकि, वीआरएस लेने वाले सैनिकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, वन रैंक वन पेंशन का लाभ शहीदों की विधवाओं को भी मिलेगा। सरकार की जुलाई 2014 से लेकर अब तक का एरियर दो सालों के भीचर चार किश्तों में देने की योजना है। विधवाओं को यह एक ही बार में दे दिया जाएगा। रक्षा मंत्री ने कहा कि एरियर पर ही 8 से 10 हजार रुपये खर्च हो जाएंगे। सुबह रक्षा मंत्री का हैदराबाद दौरा रद्द होने के साथ ही इस बात के संकेत मिल गए थे कि पूर्व सैंनिकों का इंतजार आज खत्म होने वाला है। 

दोपहर 12 बजे के करीब छह पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल ने रक्षा मंत्री से मुलाकात की। उसके बाद इंडियन एक्स सर्विसमेन मूवमेंट (आईईएसएम) के प्रमुख रिटायर्ड मेजर जनरल सतबीर सिंह ने कहा कि सरकार ने ओरआरओपी की अवधारणा को स्वीकार कर लिया और इसके लिए वह एक समिति के गठन पर विचार कर रही है। सतबीर सिंह ने बैठक के बाद कहा कि इस कमिटी में पूर्व सैन्यकर्मियों का एक प्रतिनिधि और सेना का एक प्रतिनिधि भी समिति में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कमिटी को एक महीने से अधिक समय नहीं लेना चाहिए। 

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