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गोजमुमो : दो विधायकों का इस्तीफा, दार्जिलिंग के MLA दीवान ने पार्टी भी छोड़ी

 
दार्जिलिंग : गोरखा जनमुक्ति मोर्चा  (गोजमुमो) के दो विधायकों त्रिलोक दीवान और रोहित शर्मा ने सोमवार को विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. दोनों ने गोजमुमो प्रमुख बिमल गुरुंग के निर्देश पर इस्तीफा दिया है. विधानसभा अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने त्रिलोक दीवान और रोहित शर्मा का इस्तीफा मंजूर कर लिया है. दीवान ने गुरुंग के निर्देश पर विधानसभा से इस्तीफा तो दे दिया, पर नाराजगी स्वरूप उन्होंने पार्टी भी छोड़ दी है. उन्होंने गुरुंग पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया है. त्रिलोक दीवान दार्जिलिंग और रोहित शर्मा कार्सियांग का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. गौरतलब है कि कालिम्पोंग के विधायक हरका बहादुर छेत्री ने पहले ही गोजमुमो छोड़ने की घोषणा कर दी है, हालांकि उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा नहीं दिया है. वह विधानसभा में निर्दल विधायक के रूप में बैठेंगे. 

उल्लेखनीय है कि विधानसभा में गोजमुमो के तीन विधायक थे. दीवान ने विधानसभा परिसर में सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने गोजमुमो के शीर्ष नेतृत्व के तानाशाही रवैये के चलते पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी सुप्रीमो ने बिना उनसे बात किये विधायकों को इस्तीफा देने का निर्देश दे दिया था. इससे वह अपमानित महसूस कर रहे थे. इसी कारण से उन्होंने विधायक पद के साथ-साथ पार्टी सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने कहा कि गुरुंग के पास अच्छे सलाहाकार नहीं हैं. उन्हें इसकी जरूरत है.  दूसरी ओर, कार्सियांग के विधायक रोहित शर्मा ने सदन के प्रात: सत्र में हिस्सा लिया. वह अपने हाथ में एक तख्ती लिये अपनी सीट से उठे और उन्होंने कहा कि वह गोरखा क्षेत्रीय प्रशासन (जीटीए) के मामलों में पश्चिम बंगाल सरकार के अत्यधिक हस्तक्षेप के कारण इस्तीफा दे रहे हैं. 

उन्होंने आरोप लगाया कि जीटीए को राज्य सरकार सही ढंग से काम नहीं करने दे रही है. राज्य सरकार पहाड़ के लोगों की आवाज नहीं सुन रही है. जब शर्मा अपना त्यागपत्र देने विधानसभा अध्यक्ष के आसन के पास जा रहे थे तब उनसे विधानसभा अध्यक्ष ने अपने कक्ष में आने को कहा. रोहित शर्मा ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि राज्य सरकार लेपचाओं, भूटियाओं और शेरपाओं के लिए बोर्ड के गठन के लिए गोरखा समुदाय को विभाजित कर रही है. उनकी पार्टी पृथक गोरखालैंड राज्य की मांग से पीछे नहीं हटेगी और यह 2011 में हुए जीटीए समझौते का हिस्सा है. 

गोजमुमो ने 12 सितंबर को घोषणा की थी कि जीटीए के साथ राज्य सरकार के कथित असहयोग के विरोध मेें उसके तीनों विधायक इस्तीफा देंगे, लेकिन तीन में केवल दो विधायकों ने ही इस्तीफा दिया. इनमें से त्रिलोक दीवान ने पार्टी से बगावत कर नाता तोड़ लिया, जबकि अन्य विधायक हरका बहादुर छेत्री ने विधायक पद से इस्तीफा देने से इनकार करते हुए पार्टी से इस्तीफा दे दिया है, केवल विधायक रोहित शर्मा ने ही पार्टी के निर्देश के अनुरूप विधायक पद से इस्तीफा दिया और गुरुंग का समर्थन किया है. हाल के दिनों में जीटीए चीफ बिमल गुरुंग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से खासे नाराज बताये जा रहे हैं. पहाड़ की राजनीति गरमा गयी है. गोजमुमो की ओर से अलग गोरखालैंड की मांग में आंदोलन चलाये जाने की आशंका जतायी जा रही है.



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