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वामदलों द्वारा बुलाए गए देशव्यापी बंद दार्जिलिंग क्षेत्र में रहा बेअसर

दार्जिलिंग : वामो द्वारा बुधवार को आहूत देशव्यापी बंद पर्वतीय क्षेत्र में बेअसर रहा। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के साथ ही स्कूल-कॉलेज व सरकारी एवं गैर सरकारी कार्यालय खुले रहे। जबकि बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। जिससे कई स्थानों पर एटीएम सेवा भी प्रभावित हुई। हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से व्यापक इंतजामात किए गए थे। विभिन्न स्थानों पर स्थानीय पुलिस के साथ ही सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए थे। कहीं से किसी भी तरह की अप्रिय घटना की खबर नहीं है। दार्जिलिंग प्रतिनिधि के अनुसार माकपा समर्थकों ने लाल झंडे के साथ बाजार का भ्रमण कर दुकानें बंद कराई। परंतु माकपाइयों का कारवां आगे बढ़ता गया, पीछे से दुकानों के शटर खुलते गए। आवागमन भी शुरू हो गया। स्कूली बच्चे भी स्कूल ड्रेस पहनकर अपने विद्यालय के लिए निकले। 

आम नागरिकों ने भी बाजार का रुख किया एवं सामान्य दिन की ही तरह खरीदारी की। राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं बंद रहीं। परंतु मुख्य डाकघर, जिलाधिकारी कार्यालय एवं अन्य सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय खुले रहे। जिलाधिकारी कार्यालय समेत विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा के लिहाज से सीआरपीएफ के जवानों को तैनात किया गया था। केवी वातर समेत अन्य माकपा नेता पार्टी कार्यालय पर ही रहे। वहीं, गोजमुमो कार्यालय पर सांगठनिक सचिव ज्योति कुमार राई ने भी टाउन कमेटी की बैठक कर हालात की समीक्षा की। सिलीगुड़ी समेत विभिन्न स्थानों के लिए वाहनों का परिचालन भी सामान्य ही रहा। हालांकि शहर की सड़कों पर लोगों की उतनी भीड़ नजर नहीं आई, जितनी सामान्य दिनों में रहती है। वहीं, कर्सियांग प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठान, स्कूल-कॉलेज, सरकारी-गैर सरकारी कार्यालय खुले रहे एवं कामकाज सामान्य रहा। हालांकि बैंकों के बंद होने से दूर-दराज से रुपये के लेनदेन को पहुंचे लोगों को निराशा हाथ लगी। स्थानीय सिंडिकेट से सिलीगुड़ी के लिए वाहनों का परिचालन ठप रहा। 

जिससे सिलीगुड़ी जाने के लिए निकले यात्रियों को फजीहत झेलनी पड़ी। कई लोगों को अपनी यात्रा तक रद्द करनी पड़ी। रसोई गैस का वाहन भी नहीं पहुंच पाने के कारण वितरण नहीं हो सका। गौरतलब है कि वामो ने केंद्र सरकार की नीतियों को जनविरोधी बताते हुए देशव्यापी बंद का आह्वान किया था। जिसके लिए पर्वतीय क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर पोस्टर चस्पा कर बंद के समर्थन का आह्वान किया गया था। वहीं माकपा नेता केवी वातर ने प्रेस कांफ्रेंस करके पर्वतीय क्षेत्र के सभी राजनैतिक दलों से बंद का समर्थन करने की अपील की थी। तृकां ने स्वयं को बंद से परे रखा था, जबकि गोजमुमो एवं इसके ट्रेड यूनियन ने पहले ही इस बंद को ना कर दी थी। जिसके बाद उक्त बंद का बेअसर रहना लगभग तय माना जा रहा था।

- जागरण 

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